गावं मंच डेस्क, जयपुर 11 मई । राजस्थान में पंचायत चुनावों को लेकर हो रहा इंतजार अब कानूनी पेचीदगियों में फंस गया है। राजस्थान पंचायत चुनाव देरी के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग (SEC) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में किसी भी तरह की अनावश्यक देरी स्वीकार्य नहीं होगी।
हाईकोर्ट के निर्देशों की अनदेखी पर सवाल
अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि पूर्व में दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद चुनाव प्रक्रिया को निर्धारित समय सीमा में शुरू क्यों नहीं किया गया। हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब समयसीमा पहले ही तय थी, तो तैयारियों में तेजी क्यों नहीं लाई गई।

सरकार ने गिनाईं तकनीकी बाधाएं
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से देरी के पीछे कई तकनीकी और प्रशासनिक कारण बताए गए:
- OBC आरक्षण सर्वे: पिछड़ा वर्ग आरक्षण से जुड़े सर्वे की प्रक्रिया अभी भी जारी है।
- परिसीमन प्रक्रिया: कई क्षेत्रों में नए परिसीमन का कार्य पूर्ण नहीं होना।
- वोटर लिस्ट में त्रुटियां: मतदाता सूचियों में नामों की गड़बड़ियों को ठीक करने का कार्य प्रगति पर है। सरकार का तर्क है कि इन प्रक्रियाओं को पूरा किए बिना चुनाव कराने से भविष्य में कानूनी विवाद पैदा हो सकते हैं।
विपक्ष का सरकार पर हमला
इस राजस्थान पंचायत चुनाव देरी को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए चुनावों को टाल रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की लोकतांत्रिक संस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने भी किया हाईकोर्ट का रुख
उल्लेखनीय है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुँचा था, लेकिन शीर्ष अदालत ने फिलहाल हस्तक्षेप से इनकार करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट को ही इस पर सुनवाई जारी रखने और निर्णय लेने के लिए उपयुक्त माना है।
निष्कर्ष और आगामी सुनवाई
अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं। हाईकोर्ट यह तय करेगा कि सरकार द्वारा दी गई दलीलें चुनाव टालने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं। यदि अदालत संतुष्ट नहीं होती है, तो चुनाव आयोग को जल्द से जल्द मतदान प्रक्रिया शुरू करने के सख्त निर्देश मिल सकते हैं।
- चुनाव संबंधी आधिकारिक अपडेट के लिए राज्य चुनाव आयोग, राजस्थान की वेबसाइट देखें।
- राजस्थान हाईकोर्ट के नवीनतम निर्णयों के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय पोर्टल पर विजिट करें।
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नोट:- यह विचार लेखक पत्रकार अंकित तिवारी Ankit Tiwari के है।


