गावं मंच डेस्क, जयपुर 12 मई । सहकारिता विभाग के शासन सचिव समित शर्मा ने सोमवार को शासन सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन समीक्षा (181) के दौरान विभाग से संबंधित प्रकरणों की विस्तृत जांच की। उन्होंने हेल्पलाइन के माध्यम से परिवादियों से सीधा संवाद किया और शिकायतों का तत्काल निस्तारण सुनिश्चित करवाया। शासन सचिव ने स्पष्ट किया कि पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का समाधान केवल औपचारिक न होकर व्यवहारिक और गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए।

फसली ऋण में अनियमितता पर बड़ी कार्रवाई
संवाद के दौरान अलवर जिले के महाराजावास ग्राम सेवा सहकारी समिति में अल्पकालीन फसली ऋण वितरण में गंभीर अनियमितता सामने आई। परिवादी की शिकायत सही पाए जाने पर शासन सचिव ने त्वरित कार्रवाई करते हुए:
- समिति व्यवस्थापक अभय यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए।
- राजस्थान सहकारी अधिनियम की धारा-55 के तहत जांच के आदेश दिए।
- अलवर के प्रबंध निदेशक को 7 दिन में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
इसी तरह अजमेर के एक मामले में 5 वर्ष से ऋण नहीं मिलने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करने और शाम तक समाधान करने के निर्देश दिए।

शिकायत निवारण में सहकारिता विभाग का बेहतर प्रदर्शन
राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन समीक्षा के आंकड़ों के अनुसार, सहकारिता विभाग ने पिछले एक वर्ष में शानदार कार्य किया है:
- कुल दर्ज प्रकरण: 1,22,779
- निस्तारित प्रकरण: 1,18,340 (लगभग 96 प्रतिशत)
- औसत समय: विभाग मात्र 13 दिनों में शिकायतों का निस्तारण कर रहा है।
मुख्यमंत्री की पहल: घर बैठे मिल रहा समाधान
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार, सभी विभागों के सचिव निर्धारित तिथियों पर राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन समीक्षा कंट्रोल रूम में उपस्थित होकर आमजन से सीधा संवाद कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य प्रशासनिक संवेदनशीलता को बढ़ाना और नागरिकों को घर बैठे त्वरित न्याय प्रदान करना है।
बैठक में राजफेड के प्रबंध निदेशक सौरभ स्वामी सहित सहकारिता विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
- अपनी शिकायत दर्ज करने या स्थिति जांचने के लिए राजस्थान संपर्क पोर्टल पर जाएं।
- सहकारिता विभाग की योजनाओं की जानकारी के लिए Cooperative Department Rajasthan की वेबसाइट देखें।
राजस्थान में पंचायतों, ग्राम सभाओं और ग्रामीण योजनाओं से जुड़ी ताज़ा खबरें गाँव मंच के लोकरंग सेक्शन में भी उपलब्ध हैं।
नोट:- यह विचार लेखक पत्रकार अंकित तिवारी Ankit Tiwari के है।


