Gaonmanch

राजस्थान एनर्जी कॉन्क्लेव: ऊर्जा का पावरहाउस बनेगा प्रदेश, CM ने दिए निर्देश

जयपुर, 15 मई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को राजस्थान एनर्जी कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा उत्पादन का सबसे सस्ता, प्रभावी और स्थायी विकल्प है। मुख्यमंत्री खुद इस कॉन्क्लेव में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) से पहुंचे और ईंधन बचत, पर्यावरण संरक्षण व ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने का प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संसाधनों के संयमित उपभोग से ही आत्मनिर्भरता की राह प्रशस्त होगी।

निवेशकों के लिए बेहतरीन अवसर

मुख्यमंत्री ने देश-विदेश के ऊर्जा निवेशकों से राजस्थान को ऊर्जा का पावरहाउस बनाने में भागीदारी निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि निवेश की दृष्टि से राजस्थान देश के सबसे अनुकूल राज्यों में शामिल है। राज्य सरकार की प्रगतिशील नीतियों के कारण ही प्रदेश में सौर, पवन, बायो ऊर्जा, पंप स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं में भारी निवेश के प्रस्ताव मिल रहे हैं।

राजस्थान एनर्जी कॉन्क्लेव में इलेक्ट्रिक व्हीकल से पहुंचे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

अक्षय ऊर्जा में राजस्थान के बड़े लक्ष्य

कॉन्क्लेव के दौरान प्रदेश में गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण आंकड़े और लक्ष्य साझा किए गए:

  • भावी लक्ष्य: राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक 115 गीगावाट और वर्ष 2047 तक 290 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का बड़ा लक्ष्य रखा है।
  • वर्तमान क्षमता: प्रदेश में अब तक 47 गीगावाट से अधिक की अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित हो चुकी है।
  • ऊर्जा भंडारण: वर्ष 2030 तक 10 गीगावाट की ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) परियोजना का लक्ष्य है, जिसके तहत 6 हजार मेगावाट बैटरी स्टोरेज क्षमता आवंटित की जा चुकी है।

ई-मोबिलिटी और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर

ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हीरालाल नागर ने भी कार्यक्रम में सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। राजस्थान एनर्जी कॉन्क्लेव में बताया गया कि:

  1. प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना: इसके तहत राज्य में 250 स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
  2. सौर पार्क योजना: राज्य में 4,670 मेगावाट के सोलर पार्क स्थापित हो चुके हैं, जबकि 12 हजार मेगावाट से अधिक के सोलर पार्क अभी निर्माणाधीन हैं।
  3. सरकारी भवनों का सौर्यकरण: वर्तमान में 1,000 से अधिक राजकीय भवनों पर सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं।

नोट:- यह विचार लेखक पत्रकार अंकित तिवारी Ankit Tiwari के है।

Scroll to Top