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ट्रीमैन ऑफ़ इंडिया विष्णु लाम्बा: 31 वर्षों में लगाए डेढ़ करोड़ पौधे

गावं मंच टोंक/जयपुर, 25 मई । विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आज देश ऐसे पर्यावरण योद्धा की कहानी से रूबरू हो रहा है, जिसने अपनी पूरी जिंदगी प्रकृति मां के आंचल को हरा-भरा करने में समर्पित कर दी। राजस्थान के टोंक जिले के एक छोटे से गांव लाम्बा में जन्मे विष्णु लाम्बा को आज दुनिया ट्रीमैन ऑफ़ इंडिया विष्णु लाम्बा के नाम से जानती है। मात्र 5 वर्ष की अल्पायु में अपनी माता के साथ पहला पौधा लगाने वाले विष्णु लाम्बा और पर्यावरण आज एक-दूसरे के पूरक बन चुके हैं।

बचपन में पौधों के प्रति उनकी दीवानगी ऐसी थी कि वे दूसरों के खेतों से पौधे चुराकर लगा दिया करते थे, जिसके कारण उन्हें ‘पौधा चोर’ भी कहा जाता था। लेकिन कल्पवृक्ष के तीन पत्तों से शुरू हुआ उनका यह सफर आज ‘श्री कल्पतरु संस्थान’ के रूप में देश का सबसे बड़ा पर्यावरण आंदोलन बन चुका है।

उपलब्धियां और विश्व कीर्तिमान: 31 वर्षों का अथक संघर्ष

विष्णु लाम्बा ने पिछले 31 वर्षों में अपनी टीम और वालंटियर्स के साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में ऐसे कार्य किए हैं जो किसी चमत्कार से कम नहीं हैं:

  • डेढ़ करोड़ पौधों का संरक्षण: वे अब तक देश के विभिन्न हिस्सों में 1.5 करोड़ से अधिक पौधे लगाकर उन्हें संरक्षित कर चुके हैं।
  • तुलसी वितरण का वर्ल्ड रिकॉर्ड: सवा पांच लाख (5.25 लाख) तुलसी के पौधे तैयार कर निःशुल्क वितरित करने का विश्व कीर्तिमान उनके नाम दर्ज है।
  • इको-फ्रेंडली वेडिंग: ऋग्वेद काल के बाद देश का पहला ऐसा विवाह संपन्न कराया (उनके छोटे भाई का), जिसमें दहेज की जगह सिर्फ कल्पवृक्ष के दो पौधे लिए गए। शादी में मिट्टी के कुल्हड़ और पत्तलों का उपयोग हुआ।
  • शहीदों के नाम पौधारोपण: देश के 22 राज्यों का भ्रमण कर 56 से अधिक स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों के परिवारों को तलाशा और शहीदों के जन्म व बलिदान स्थलों पर पौधे लगाए।
विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधारोपण करते ट्रीमैन ऑफ़ इंडिया विष्णु लाम्बा और उनके संस्थान के वालंटियर्स

चम्बल के डकैतों से लेकर नक्सलियों तक को बनाया ‘वृक्ष मित्र’

ट्रीमैन विष्णु लाम्बा का कार्य करने का अंदाज बेहद निराला और ऐतिहासिक है। फिल्म ‘पान सिंह तोमर’ से प्रेरित होकर उन्होंने चम्बल के पूर्व कुख्यात दस्युओं (डकैतों) को अपनी मुहिम से जोड़ा। उन्हें जयपुर बुलाकर पर्यावरण की शपथ दिलाई, जिसके बाद किसी ने जंगल उगाया तो किसी ने स्कूल और गौशाला गोद ली।

इसी सफलता के बाद अब संस्थान ने ‘नक्सल ग्रीन मिशन’ का आगाज किया है, जिसके अंतर्गत आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों को ‘वृक्ष मित्र’ बनाकर मुख्यधारा में लाया जा रहा है ताकि वे जल, जंगल और जमीन के संरक्षण में योगदान दे सकें। इसके अतिरिक्त, राजस्थान पुलिस के साथ “खाकी वॉरियर्स अभियान” चलाकर सैकड़ों पुलिस परिसरों को हरा-भरा किया गया है।

“अब दो गज कफन और दो गज जमीन की जगह दो मन लकड़ी की बात होनी चाहिए। जिसने अपने जीवन में कम से कम पांच पेड़ नहीं लगाए, उसे चिता पर जलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। हर व्यक्ति को अपने अंतिम संस्कार के लिए अपने जीवन में 5 पेड़ जरूर लगाने चाहिए।” — विष्णु लाम्बा (ट्रीमैन ऑफ इंडिया)

संयुक्त राष्ट्र तक गूंज और राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मान

विष्णु लाम्बा के इन सार्थक प्रयासों की गूंज संयुक्त राष्ट्र (UN) तक पहुंच चुकी है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के छठे प्रमुख एरिक सोलहेम स्वयं उनके पैतृक गांव लाम्बा पहुंचकर उनके कार्यों की सराहना कर चुके हैं।

अमिताभ बच्चन और रवीना टंडन के साथ महाराष्ट्र सरकार की ‘ग्रीन आर्मी’ के ब्रांड एंबेसडर रह चुके लाम्बा को अब तक राजीव गांधी पर्यावरण पुरस्कार और अमृता देवी बिश्नोई पुरस्कार सहित 500 से अधिक राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। वर्तमान में वे वर्ष 2047 तक देश के 100 गांवों को आदर्श पर्यावरणीय ग्राम बनाने और 5 करोड़ पौधे लगाने के लक्ष्य पर निरंतर काम कर रहे हैं।

  • विश्व पर्यावरण दिवस की वैश्विक पहलों, ‘हरियालो राजस्थान’ जैसी राजकीय योजनाओं और मरुस्थलीकरण को रोकने के सरकारी प्रयासों की जानकारी के लिए वन विभाग, राजस्थान सरकार के आधिकारिक वेब पोर्टल पर विजिट करें।
  • संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक पर्यावरण कार्यक्रमों, क्लाइमेट चेंज नीतियों और अंतरराष्ट्रीय इको-प्रोजेक्ट्स के अपडेट्स देखने के लिए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

राजस्थान में पंचायतों, ग्राम सभाओं और ग्रामीण योजनाओं से जुड़ी ताज़ा खबरें गाँव मंच के लोकरंग सेक्शन में भी उपलब्ध हैं।

नोट:- यह विचार लेखक पत्रकार अंकित तिवारी Ankit Tiwari के है।

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