गांव मंच डेस्क, नई दिल्ली। देश में मानसून की शुरुआत के साथ ही मौसम विशेषज्ञों ने अल नीनो (El Niño) के संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। अल नीनो के कारण कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका रहती है, जिसका सीधा असर खेती और किसानों की आय पर पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों और राज्यों के कृषि विभागों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को किसी भी तरह की परेशानी से बचाने के लिए समय रहते सभी जरूरी इंतजाम किए जाएं। सरकार का उद्देश्य साफ है—अगर मौसम साथ न भी दे, तब भी किसानों की मेहनत और फसल सुरक्षित रहे।
क्या होता है अल नीनो?
अल नीनो एक प्राकृतिक मौसमीय घटना है, जो प्रशांत महासागर के तापमान में बदलाव के कारण पैदा होती है। इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है। भारत में अल नीनो के दौरान अक्सर मानसून कमजोर पड़ जाता है और कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की जाती है।
बारिश कम होने का सबसे ज्यादा असर खेती पर पड़ता है, क्योंकि देश के लाखों किसान आज भी वर्षा आधारित कृषि पर निर्भर हैं।
सरकार क्यों हुई सतर्क?
पिछले कुछ वर्षों में मौसम के बदलते स्वरूप ने किसानों की चुनौतियां बढ़ाई हैं। कभी बेमौसम बारिश, कभी ओलावृष्टि और कभी सूखे जैसी परिस्थितियां किसानों के लिए चिंता का कारण बनी हैं। ऐसे में सरकार इस बार किसी भी संभावित संकट से पहले तैयारी करना चाहती है।
कृषि मंत्रालय का मानना है कि यदि समय रहते सही योजना बना ली जाए तो फसल नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
किसानों के लिए क्या-क्या तैयारियां की जा रही हैं?
सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की योजना बनाई है—
- आपातकालीन स्थिति के लिए बीजों का पर्याप्त भंडारण।
- कम पानी में उगने वाली फसलों को बढ़ावा।
- राज्यों के लिए विशेष कंटिजेंसी (वैकल्पिक) फसल योजना।
- किसानों तक मौसम संबंधी जानकारी तेजी से पहुंचाना।
- कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों की नियमित निगरानी।
- जल संरक्षण और सिंचाई प्रबंधन पर विशेष ध्यान।
इन उपायों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी क्षेत्र में बारिश कम हो जाए तो भी किसान खेती जारी रख सकें।
वैकल्पिक फसल योजना क्या है?
अगर किसी इलाके में समय पर बारिश नहीं होती है, तो वहां किसानों को ऐसी फसलें लगाने की सलाह दी जाएगी जिन्हें कम पानी की जरूरत होती है। उदाहरण के तौर पर कुछ क्षेत्रों में धान की जगह मोटे अनाज, दालें या अन्य कम पानी वाली फसलें लगाने का सुझाव दिया जा सकता है।
इससे किसानों की लागत कम होगी और फसल खराब होने का खतरा भी घटेगा।
किसानों को कैसे मिलेगा सीधा लाभ?
सरकार की इस योजना का सबसे बड़ा फायदा किसानों को ही मिलेगा। समय पर बीज, सही सलाह और मौसम की जानकारी मिलने से वे बेहतर निर्णय ले सकेंगे।
इसके अलावा—
- फसल नुकसान का जोखिम कम होगा।
- कम पानी में भी खेती संभव होगी।
- उत्पादन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
- आर्थिक नुकसान कम हो सकता है।
- खेती की लागत पर नियंत्रण रहेगा।
किसानों के लिए विशेषज्ञों की सलाह
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को मौसम विभाग की अपडेट पर नजर रखनी चाहिए। खेतों में उपलब्ध पानी का सोच-समझकर उपयोग करना चाहिए और स्थानीय कृषि अधिकारियों की सलाह के अनुसार फसलों का चयन करना चाहिए।
विशेषज्ञ यह भी सलाह दे रहे हैं कि किसान जल संरक्षण के उपाय अपनाएं और जहां संभव हो वहां सूखा सहन करने वाली किस्मों का उपयोग करें।
खेती के लिए चुनौती भी, तैयारी का अवसर भी
अल नीनो को लेकर चिंता जरूर है, लेकिन समय रहते की गई तैयारी इस चुनौती को काफी हद तक कम कर सकती है। सरकार, कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के संयुक्त प्रयास से मौसम की मार का असर घटाया जा सकता है।
रिपोर्ट:- रिद्विमा


