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74 देशों ने लगाया बैन, भारत में अब भी बिक रहा खतरनाक कीटनाशक

गांव मंच डेस्क, देश में खेती के लिए इस्तेमाल होने वाले कुछ कीटनाशकों और खरपतवारनाशकों को लेकर बहस तेज हो गई है। पैराक्वाट डाइक्लोराइड और ग्लाइफोसेट जैसे रसायनों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर किसान संगठन, पर्यावरणविद और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि इन रसायनों का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं दोनों की सेहत पर पड़ सकता है।

कई राज्यों ने उठाए कदम

हाल ही में आंध्र प्रदेश सरकार ने पैराक्वाट डाइक्लोराइड के उपयोग पर 60 दिनों की अस्थायी रोक लगाई है। इससे पहले केरल, तेलंगाना और ओडिशा भी इस रसायन को लेकर प्रतिबंधात्मक कदम उठा चुके हैं। इसके बाद देशभर में इस पर स्थायी प्रतिबंध लगाने की मांग और तेज हो गई है।

किसान संगठनों ने उठाई आवाज

किसान महापंचायत सहित कई किसान संगठनों का कहना है कि जिन रसायनों पर दुनिया के कई देशों में प्रतिबंध लगाया जा चुका है, उनकी भारत में बिक्री और उपयोग पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। संगठनों का तर्क है कि खेती का उद्देश्य सुरक्षित खाद्य उत्पादन होना चाहिए, न कि ऐसे रसायनों का इस्तेमाल जो स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकते हैं।

आखिर क्यों चर्चा में है पैराक्वाट

विशेषज्ञों के अनुसार पैराक्वाट डाइक्लोराइड अत्यधिक विषैला रसायन माना जाता है। इसके संपर्क में आने से फेफड़े, किडनी और लिवर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इसके विषैले प्रभाव का कोई निश्चित एंटीडोट उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि दुनिया के कई देशों ने इसके उपयोग पर रोक लगा दी है।

भारत में क्यों बना हुआ है इसका इस्तेमाल

कृषि क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि पैराक्वाट खरपतवार नियंत्रण में तेजी से असर दिखाता है। मजदूरों की कमी और बढ़ती लागत के कारण कई किसान इसे आसान विकल्प मानते हैं। हालांकि सुरक्षा उपकरणों की कमी और जागरूकता के अभाव में इसके इस्तेमाल से जोखिम बढ़ जाता है।

कानूनी और वैज्ञानिक स्तर पर जारी बहस

देश में खतरनाक कीटनाशकों की समीक्षा को लेकर समय-समय पर विशेषज्ञ समितियां बनाई गई हैं। विभिन्न वैज्ञानिकों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से ऐसे रसायनों पर दोबारा विचार करने और किसानों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की है। इस मुद्दे से जुड़ी याचिकाएं अदालतों में भी लंबित हैं।

जागरूकता की कमी भी बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को सुरक्षित उपयोग, सुरक्षा उपकरणों और वैकल्पिक उपायों की पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाती। ऐसे में प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत करना जरूरी है, ताकि खेती की उत्पादकता के साथ किसानों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।

किसानों की सुरक्षा सबसे बड़ी जरूरत

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खेती में आधुनिक तकनीक और रसायनों का उपयोग जरूरी हो सकता है, लेकिन किसानों की सेहत और सुरक्षित खाद्य उत्पादन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में खतरनाक रसायनों की समीक्षा, वैज्ञानिक जांच और सुरक्षित विकल्पों को बढ़ावा देना समय की मांग बन गया है।

लेखक-हिना शर्मा

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