गांव मंच डेस्क, अहमदाबाद जहां अधिकांश लोग एयरोस्पेस इंजीनियरिंग जैसी प्रतिष्ठित नौकरी को जीवन की बड़ी उपलब्धि मानते हैं, वहीं अहमदाबाद की निश्ठा चौहान ने एक अलग रास्ता चुना। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उन्होंने एयरोस्पेस क्षेत्र में काम किया और इसरो से जुड़े सैटेलाइट प्रोजेक्ट्स पर भी योगदान दिया। लेकिन पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ जीवनशैली के प्रति उनकी बढ़ती रुचि ने उन्हें नौकरी छोड़कर कुछ नया करने के लिए प्रेरित किया। इसी सोच से जन्म हुआ ‘कैफे आरंभ’ का।
मिलेट्स को बनाया कैफे की पहचान
निश्ठा ने 2021 में अहमदाबाद में कैफे आरंभ की शुरुआत की। इस कैफे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां पारंपरिक भारतीय मोटे अनाज यानी मिलेट्स को आधुनिक स्वाद के साथ परोसा जाता है। मेन्यू में रागी डोसा, बाजरा भेल, मिलेट मोमोज और रागी बन से बना वड़ा पाव जैसे व्यंजन शामिल हैं। उनका मानना है कि मिलेट्स न केवल स्वास्थ्य के लिए बेहतर हैं बल्कि इन्हें उगाने में पानी और संसाधनों की भी कम जरूरत होती है, जिससे खेती अधिक टिकाऊ बनती है। भारत में मोटे अनाज (Millets) की बढ़ती मांग
जीरो-वेस्ट मॉडल से बदल रही खानपान की संस्कृति
कैफे आरंभ सिर्फ एक रेस्तरां नहीं, बल्कि एक पर्यावरणीय आंदोलन की तरह काम करता है। यहां सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल लगभग नहीं के बराबर है। भोजन कांच के बर्तनों में परोसा जाता है, जैविक कचरे से कम्पोस्ट तैयार की जाती है और जरूरत पड़ने पर केवल बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग का उपयोग किया जाता है। कैफे में भोजन सीमित मात्रा में तैयार किया जाता है ताकि खाने की बर्बादी न हो। यहां तक कि एयर कंडीशनर की जगह पानी आधारित कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे ऊर्जा की खपत भी कम होती है। जैविक खेती से बढ़ रही किसानों की आय

बच्चों को सिखा रहा है टिकाऊ जीवन का पाठ
कैफे आरंभ का प्रभाव केवल भोजन तक सीमित नहीं है। निश्ठा ने इसे बच्चों के लिए सीखने का केंद्र भी बना दिया है। पिछले कुछ वर्षों में 2,000 से अधिक बच्चे यहां आयोजित कार्यशालाओं में शामिल हो चुके हैं। इन सत्रों में बच्चों को खेती, कम्पोस्टिंग, पौष्टिक भोजन और पर्यावरण संरक्षण के बारे में व्यावहारिक तरीके से सिखाया जाता है। कई बच्चे इन गतिविधियों से प्रेरित होकर घरों में किचन गार्डन और कम्पोस्टिंग जैसी पहल भी शुरू कर चुके हैं।
1.44 करोड़ की कमाई और पर्यावरण पर बड़ा असर
निश्ठा चौहान का यह प्रयोग आज आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर सफल साबित हो चुका है। कैफे आरंभ की मासिक आय लगभग 12 लाख रुपये बताई जाती है, यानी सालाना कारोबार करीब 1.44 करोड़ रुपये है। इससे भी बड़ी उपलब्धि यह है कि कैफे हर साल लगभग 47 टन प्लास्टिक कचरे और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद कर रहा है। बिना किसी बाहरी निवेश के शुरू हुआ यह उद्यम आज यह साबित कर रहा है कि लाभ और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।
International Year of Millets – Government of India
The Better India – Cafe Aarambh Story
FAO – Sustainable Food Systems
Edited by- Krishika Agarwal


