नई दिल्ली, 16 जून 2026। कभी पेट्रोलियम रिफाइनिंग का सामान्य उप-उत्पाद माना जाने वाला सल्फर आज वैश्विक कृषि क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण रहा है। आपूर्ति संकट, भू-राजनीतिक तनाव और बदलते व्यापारिक दूसरी ओर समीकरणों ने इसकी मांग और कीमतों नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सल्फर अब केवल उर्वरकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आधुनिक कृषि की कई जरूरतों का आधार बन चुका है। हीट स्ट्रेस और डेयरी पशुओं की प्रजनन क्षमता पर असर
सल्फर की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
पिछले कुछ वर्षों में सल्फर की कीमतों में तीन से चार गुना तक वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, इससे बनने कीमतें इसके अलावा केवल दो से ढाई गुना बढ़ी हैं। इस असंतुलन ने उर्वरक और फसल संरक्षण उद्योग पर भारी दबाव पैदा किया है। रिफाइनरी बंद होने, वैश्विक आपूर्ति बाधाओं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितताओं ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के आधुनिक तरीके

पौधों के लिए चौथा सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व
आज सल्फर को नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के बाद इसके साथ चौथे प्रमुख पोषक तत्व के जाता है। यह प्रोटीन संश्लेषण, अमीनो एसिड निर्माण और क्लोरोफिल विकास में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा तेलीय फसलों में तेल की दक्षता सुधारने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लगातार खेती और उच्च उत्पादन वाली किस्मों के कारण कई क्षेत्रों की मिट्टी में सल्फर की कमी तेजी से बढ़ रही है।
उर्वरक निर्माण की रीढ़ बना सल्फर
सल्फर का सबसे बड़ा उपयोग वहीं एसिड बनाने में होता है। यही एसिड फास्फेट उर्वरकों के दूसरी ओर उत्पादन का आधार है। डाइ-अमोनियम फास्फेट (DAP), सिंगल सुपर (SSP) और इसके अलावा फास्फेट आधारित उर्वरकों के निर्माण में इसकी आवश्यकता होती है। इसके साथ सल्फर की उपलब्धता प्रभावित होने पर उर्वरक उद्योग की उत्पादन क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
फसल सुरक्षा और आधुनिक एग्रोकेमिकल्स में अहम भूमिका
सल्फर का उपयोग सीधे फफूंदनाशक और कीटनाशक उत्पादों में भी किया जाता है। यह प्रभावी और किफायती साधन माना जाता है। इसके अलावा आधुनिक एग्रोकेमिकल्स, विशेष रसायनों और वहीं फसल सुरक्षा उत्पादों के निर्माण में साथ ही भी सल्फर महत्वपूर्ण बल्कि कच्चा माल है। यही कृषि विशेषज्ञ इसे ऐसा दुर्लभ संसाधन मानते हैं जो पोषण, उर्वरक निर्माण, फसल सुरक्षा और रासायनिक उद्योग—चारों क्षेत्रों को एक साथ समर्थन देता है।
कृषि की भविष्य की जरूरतों का केंद्र
विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ती खाद्य मांग और मिट्टी की पोषण चुनौतियों के बीच सल्फर का महत्व दूसरी ओर आने वाले वर्षों में और बढ़ेगा। कृषि उत्पादन, फसल गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के रणनीतिक प्राथमिकता बन चुकी है। ऐसे में इसे केवल एक औद्योगिक उप-उत्पाद नहीं, बल्कि इसके साथ कृषि की के रूप में देखा जा रहा है।
FAO – Sulphur and Plant Nutrition Resources
International Fertilizer Association (IFA)
Nutrient Stewardship and Sulphur Management Guide
Edited by- Krishika agarwal


