- गांव मंच डेस्क, राजस्थान देशभर की कई मंडियों में दाल और तिलहन के दाम लगातार दबाव में हैं।
- इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। खासकर सोयाबीन उत्पादक किसानों को बेहतर कीमत नहीं मिल रही है।
- कई किसानों का कहना है कि खेती की लागत बढ़ रही है, लेकिन बाजार में उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा।
- ऐसे में खरीफ सीजन की बुवाई को लेकर किसानों के बीच असमंजस की स्थिति बन रही है।
- हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा।
- किसानों को लाभकारी मूल्य मिलना भी उतना ही जरूरी है।
आयात शुल्क में कटौती का दिख रहा असर
- इस बीच खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में की गई कटौती भी चर्चा में है।
- उद्योग संगठनों का मानना है कि इस फैसले से विदेशों से आने वाला खाद्य तेल सस्ता हुआ है। हालांकि इससे उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिल सकती है।
- सरकार और बाजार नियामक संस्थाएं किसान उत्पादक संगठनों यानी एफपीसी को भी प्रशिक्षित कर रही हैं।
- लेकिन दूसरी ओर घरेलू तिलहन किसानों पर इसका दबाव बढ़ा है। उनका कहना है कि सस्ते आयात के कारण सोयाबीन और अन्य तिलहनों की कीमतें कमजोर हुई हैं।
- यही वजह है कि कई किसान अब फसल चयन को लेकर नए सिरे से सोच रहे हैं।
- इस बीच खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में की गई कटौती भी चर्चा में है। उद्योग संगठनों का मानना है कि इस फैसले से विदेशों से आने वाला खाद्य तेल सस्ता हुआ है।
Ministry of Agriculture & Farmers Welfare
National Food Security Mission (NFSM)
Food Corporation of India (FCI)

Edited by- Krishika Agarwal


