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जयपुर गुरुपूर्णिमा कार्यक्रम में बाबा उमाकांत जी महाराज का संदेश, गौ रक्षा, नशामुक्ति और आध्यात्मिक जीवन पर जोर

गाँवमंच डेस्क, जयपुर, 27 जुलाई। जयपुर के ठिकारिया स्थित जयगुरुदेव आश्रम में बाबा उमाकांत जी महाराज के सानिध्य में आयोजित तीन दिवसीय जयपुर गुरुपूर्णिमा कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिक सत्संग और प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाराज जी ने गौ रक्षा, नशामुक्त समाज, युवा संस्कार और सनातन धर्म के मूल स्वरूप पर विस्तार से विचार रखे।

जीवात्मा की मुक्ति को बताया सच्चा सनातन धर्म

  • पत्रकारों को संबोधित करते हुए बाबा उमाकांत जी महाराज ने कहा कि मानव शरीर पंचतत्वों जल, अग्नि, पृथ्वी, वायु और आकाश
  • से बना है और इसका वास्तविक उद्देश्य आत्मा को परमात्मा से जोड़कर मुक्ति और मोक्ष की ओर बढ़ना है।
  • उन्होंने कहा कि सत्संग और सद्गुरु के मार्गदर्शन के बिना मनुष्य भटक जाता है, जिससे उसके विचार,
  • खानपान और आचरण प्रभावित होते हैं।

युवाओं को नशे से बचाने पर दिया विशेष बल

  • महाराज जी ने कहा कि गलत संगति युवाओं को नशे और अपराध की ओर ले जाती है,
  • जबकि अच्छी संगत और सत्संग उन्हें संस्कारित और आध्यात्मिक बना सकते हैं।
  • उन्होंने कहा कि शराब और अन्य नशे परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं
  • और युवाओं में वैचारिक परिवर्तन लाना समय की आवश्यकता है।

गौ हत्या रोकने के लिए कानून बनाने की अपील

  • गौ रक्षा अभियान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश के धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक, पत्रकार और बुद्धिजीवी वर्ग
  • को गृह मंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से आग्रह करना चाहिए कि देशभर में गौ हत्या रोकने के लिए कानून बनाया जाए
  • उन्होंने इसे सामाजिक और आध्यात्मिक जागरूकता से जुड़ा विषय बताया।

भारत के भविष्य को लेकर जताई चिंता

  • महाराज जी ने कहा कि वर्तमान समय में क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसी प्रवृत्तियां बढ़ रही हैं।
  • उनका मानना है कि यदि लोगों के विचार और खानपान शुद्ध हों, तो समाज में सद्भाव और शांति स्थापित हो सकती है।
  • इसी उद्देश्य से साधना शिविर और नामधूनी शिविरों के माध्यम से लोगों को शाकाहार, नशामुक्ति
  • और सदाचार के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

शाकाहार और ईश्वरवादिता का संदेश

  • कार्यक्रम के अंत में बाबा उमाकांत जी महाराज ने सभी नागरिकों से शाकाहारी, सदाचारी, नशामुक्त, चरित्रवान और
  • ईश्वरवादी जीवन अपनाने का आह्वान किया।
  • उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जीवन ही व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के कल्याण का आधार बन सकता है।

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Edited by – Krishika Agarwal

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