गांवमंच डेस्क, जयपुर। हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जयपुर में एक विशेष पुस्तक का लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। यह आयोजन जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (जार) द्वारा जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी के मीडिया स्कूल के सहयोग से किया गया। समारोह में वरिष्ठ पत्रकारों, मीडिया विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भाग लेकर पत्रकारिता के बदलते स्वरूप और उसकी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम का आयोजन और उद्देश्य
- यह समारोह जेएलएन मार्ग स्थित मोरारका प्रसाद सभागार में आयोजित किया गया।
- कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हिन्दी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों की यात्रा को नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत करना
- और मीडिया छात्रों को पत्रकारिता के इतिहास, मूल्यों और सामाजिक दायित्वों से परिचित कराना था।
- आयोजकों के अनुसार यह पुस्तक हिन्दी पत्रकारिता के विकास, स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका
- और आधुनिक मीडिया के बदलते स्वरूप को समाहित करती है।

मुख्य अतिथि ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर रखे विचार
- कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं पीआईबी के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. धर्मेंद्र भारती ने कहा
- कि पत्रकारिता लगातार परिवर्तन के दौर से गुजर रही है।
- डिजिटल मीडिया और नई तकनीकों ने समाचारों के प्रस्तुतीकरण और उपभोग के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है।
- उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार पत्रकारों और मीडिया कर्मियों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चला रही है
- तथा वेलफेयर फंड के माध्यम से जरूरतमंद पत्रकारों को सहायता भी प्रदान की जा रही है।
मीडिया छात्रों के लिए उपयोगी साबित होगी पुस्तक
- समारोह की अध्यक्षता कर रहे जेएनयू के वाइस चांसलर प्रो. बी. सी. प्रोफेसर एच. एन. वर्मा
- ने कहा कि यह पुस्तक मीडिया छात्रों और युवा पत्रकारों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगी।
- उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का इतिहास जानना उतना ही आवश्यक है जितना आधुनिक मीडिया तकनीकों को समझना।
- उन्होंने विश्वास जताया कि पुस्तक नई पीढ़ी में मीडिया के प्रति जिम्मेदारी और सामाजिक चेतना को मजबूत करेगी।
वरिष्ठ पत्रकारों ने जताई चिंता
- पिंकसिटी प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि दो सौ वर्ष पहले की पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य देश सेवा,
- समाज जागरण और स्वतंत्रता की चेतना को मजबूत करना था,
- जबकि वर्तमान समय में मीडिया के कई क्षेत्रों में मूल्यों का क्षरण दिखाई देता है।
- उन्होंने कहा कि बदलते समय में पत्रकारिता को अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए तथ्यपरकता,
- निष्पक्षता और सामाजिक उत्तरदायित्व को प्राथमिकता देनी होगी।
राष्ट्रहित और समाज सेवा की भावना जरूरी
- विशिष्ट अतिथि डॉ. विवेक शर्मा ने कहा कि डॉक्टर, राजनेता और पत्रकार जैसे पेशों में कार्य करने वाले लोगों के भीतर राष्ट्र
- और समाज के प्रति समर्पण की भावना होना अनिवार्य है।
- केवल आर्थिक लाभ के उद्देश्य से किए गए कार्य समाज में दीर्घकालिक प्रभाव नहीं छोड़ सकते।
डिजिटल युग में पत्रकारिता की नई चुनौतियां
- वरिष्ठ पत्रकार श्याम माथुर ने कहा कि तेजी से बदलते मीडिया परिवेश में पत्रकारों को लगातार नई तकनीकों,
- डिजिटल प्लेटफॉर्म और सूचना सत्यापन की प्रक्रियाओं को सीखना होगा।
- उन्होंने कहा कि यह पुस्तक मीडिया विद्यार्थियों और नए पत्रकारों को समकालीन पत्रकारिता को समझने में मदद करगी।
पुस्तक की डिज़ाइनिंग में छात्रों का योगदान
- कार्यक्रम में डॉ. मौलिक शाह ने पुस्तक की विषयवस्तु और निर्माण प्रक्रिया की जानकारी दी।
- पुस्तक की डिज़ाइनिंग में सहयोग करने वाले जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी के छात्रों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय महासचिव निर्वाचित होने पर स्वागत
- समारोह के दौरान नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स, इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव निर्वाचित
- होने पर राकेश कुमार शर्मा का जार परिवार द्वारा स्वागत किया गया।
इस अवसर पर जार राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सोनी, महासचिव प्रमोद पारिक, संगठन मंत्री भंवर सिंह कुशवाह, उपाध्यक्ष जगदीश शर्मा, प्रदेश सचिव अशोक श्रीमाल, जयपुर अध्यक्ष लोकेश जैन, महासचिव विशाल माथुर, जयपुर ग्रामीण अध्यक्ष सुरेश शर्मा, कोषाध्यक्ष बनवारी लाल शर्मा, अजमेर जार अध्यक्ष अकलंक शर्मा सहित बड़ी संख्या में पत्रकार और मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
हिन्दी पत्रकारिता की 200 वर्षीय यात्रा का महत्व
- हिन्दी पत्रकारिता ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आधुनिक लोकतंत्र तक जनमत निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- बदलते डिजिटल दौर में जहां सूचना का प्रवाह तेज हुआ है, वहीं पत्रकारिता की विश्वसनीयता,
- नैतिकता और तथ्य आधारित रिपोर्टिंग की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है।
- जयपुर में आयोजित यह समारोह केवल पुस्तक लोकार्पण तक सीमित नहीं रहा,
- बल्कि यह हिन्दी पत्रकारिता की विरासत, उसके मूल्यों और भविष्य की दिशा पर गंभीर मंथन का महत्वपूर्ण मंच भी बना।
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Edited by – Riddhima


