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सवाई माधोपुर के अमरूदों ने बनाई कारोबारी पहचार, आज देश विदेश में सप्लाई

गांव मंच डेस्क, दिल्ली। रणथंभौर के बाघों और ऐतिहासिक किले के लिए विश्व प्रसिद्ध सवाई माधोपुर जिला अब अमरूद की खेती के लिए भी पूरे देश में अपनी अलग पहचान बना चुका है। राजस्थान के इस जिले में अमरूद का उत्पादन राज्य की कुल पैदावार का 65% से अधिक हिस्सा रखता है, और सालाना कारोबार 300 से 500 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। यहां के अमरूद बड़े आकार, रसीलेपन और मीठे स्वाद के लिए मशहूर हैं, जो दिल्ली, पंजाब, हरियाणा सहित कई राज्यों में सप्लाई होते हैं।

खेती की शुरुआत और विस्तार

अमरूद की खेती की शुरुआत यहां 1985 में करमोदा गांव में मात्र 5 हेक्टेयर क्षेत्र से हुई थी। आज जिले में 12,000 से 15,000 हेक्टेयर क्षेत्र में अमरूद के बगीचे लहलहा रहे हैं। करमोदा, सूरवाल, दौंदरी, शेरपुर-खिलचीपुर, ओलवाड़ा जैसे दर्जनों गांवों में हजारों किसान इसकी बागवानी कर रहे हैं। जिले की काली मिट्टी और उपयुक्त जलवायु अमरूद के लिए आदर्श साबित हुई है। यहां की नर्सरियां इतनी विकसित हो चुकी हैं कि उत्तर प्रदेश तक पौधे सप्लाई किए जा रहे हैं। प्रमुख किस्में  लखनऊ-49 (सफेदा), इलाहाबाद सफेदा, बर्फखाना गोला और ताइवान पिंक। ये किस्में बड़े फल, कम बीज और बेहतरीन स्वाद के लिए जानी जाती हैं। एक पेड़ से 90-100 किलो तक उत्पादन होता है, और हाई डेंसिटी प्लांटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से किसान अच्छी कमाई कर रहे हैं। कई किसान ऑर्गेनिक खेती अपनाकर घरेलू तरीकों से कीटनाशक बना रहे हैं, जैसे अदरक-नींबू का स्प्रे।

प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन

अधिकांश अमरूद ताजा बेचे जाते हैं, लेकिन प्रसंस्करण की अपार संभावनाएं हैं। अमरूद में पेक्टिन की प्रचुर मात्रा होने से यह जैली, जूस, नेक्टर और जैम बनाने के लिए उत्तम है। वर्तमान में छोटे स्तर पर कुछ यूनिट्स जूस और जैम बना रही हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर प्रोसेसिंग यूनिट्स की कमी है। हाल के वर्षों में सरकार ने अमरूद, आंवला और मिर्च के लिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित करने की घोषणाएं की हैं, जो किसानों को पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस कम करने और अधिक मुनाफा देने में मदद करेंगी।

नवाचार और भविष्य की उम्मीदें

किसान अब हाई डेंसिटी प्लांटिंग, ड्रिप इरिगेशन और फेरोमोन ट्रैप्स जैसे नवाचार अपना रहे हैं, जिससे कीटों का प्रकोप कम हो रहा है। ऑर्गेनिक फार्मिंग और जीरो बजट खेती के प्रयोग भी बढ़ रहे हैं। हालांकि, अनियमित बारिश, कीट हमले और प्रोसेसिंग की कमी चुनौतियां हैं। आने वाले समय में प्रोसेसिंग यूनिट्स और बेहतर मार्केटिंग से सवाई माधोपुर का अमरूद न केवल देश बल्कि विदेशों में भी अपनी मिठास बिखेर सकता है।यह मीठा फल न सिर्फ किसानों की आय बढ़ा रहा है, बल्कि पूरे जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है। सवाई माधोपुर का अमरूद सचमुच राजस्थान का गौरव है!

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