गांव मंच डेस्क, दिल्ली। भारत के किसान इस रबी सीजन में जोर-शोर से फसलों की बुवाई कर रहे हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर मध्य तक रबी फसलों की बुवाई सामान्य क्षेत्र के लगभग 85-88 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो पिछले साल से 4.5 प्रतिशत अधिक है। कुल बुवाई क्षेत्र 536 लाख हेक्टेयर से अधिक हो चुका है। अच्छी मॉनसून के बाद की नमी, बढ़ी हुई एमएसपी और अनुकूल मौसम ने किसानों का उत्साह बढ़ाया है।
- फसलवार बुवाई की स्थिति (दिसंबर मध्य तक, लाख हेक्टेयर में)
- कुल रबी बुवाई: 536.76 (पिछले साल से 24 लाख हेक्टेयर अधिक)
- गेहूं: लगभग 275-280 (पिछले साल से 6-11% बढ़ोतरी, सबसे ज्यादा उछाल)
- दालें: 117.11 (चना मुख्य, 84.91 लाख हेक्टेयर, 4% बढ़ोतरी)
- तिलहन: 89.79 (सरसों 84.67, 3-5% बढ़ोतरी)
- मोटे अनाज: 41.77 (जौ और मक्का में अच्छी बढ़त)
- रबी चावल: 12.44 (16% बढ़ोतरी)

गेहूं और सरसों की बुवाई में सबसे ज्यादा
गेहूं और सरसों की बुवाई में सबसे ज्यादा तेजी आई है, जबकि दालों में चना प्रमुख योगदान दे रहा है। तिलहन क्षेत्र सामान्य से अधिक हो चुका है, जो खाद्य तेल आत्मनिर्भरता के लिए अच्छा संकेत है।
उत्तर और मध्य भारत में बुवाई पिछले साल से बेहतर
उत्तर भारत के राज्य गेहूं और सरसों में आगे हैं। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश में गेहूं की बुवाई तेज रही। राजस्थान में सरसों और चना प्रमुख हैं, जहां चना और जौ की बुवाई लक्ष्य से आगे निकल चुकी है। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र दालों के बड़े उत्पादक बने हुए हैं। कुल मिलाकर, उत्तर और मध्य भारत में बुवाई पिछले साल से बेहतर है, जबकि कुछ क्षेत्रों में देर से बारिश के कारण शुरुआत थोड़ी हुई, लेकिन अब रफ्तार पकड़ ली है।
पैदावार की उम्मीदें और मौजूदा मौका
अभी पैदावार के आधिकारिक अनुमान नहीं आए हैं, लेकिन अधिक बुवाई क्षेत्र, अच्छी सिंचाई और कोई बड़ा मौसमी संकट न होने से रबी उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर रहने की संभावना है। गेहूं 112-120 मिलियन टन तक पहुंच सकता है। दालें और तिलहन में भी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। सरकार की बढ़ी एमएसपी (गेहूं के लिए 160 रुपये क्विंटल अधिक) ने किसानों को प्रोत्साहित किया है।चुनौतियां कम हैं, लेकिन कुछ क्षेत्रों में कीट प्रकोप या ठंड का असर नजर रखना होगा। कुल मिलाकर, यह रबी सीजन किसानों की आय बढ़ाने और देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत करने वाला साबित हो रहा है। हरे-भरे खेत देश की समृद्धि की नई कहानी लिख रहे हैं!


