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श्रीगंगानगर और पंजाब का किन्नू: रसीली मिठास से किसानों की चमकती किस्मत

गांव मंच डेस्क, पंजाब।  उत्तर भारत की ठंडी हवाओं में जब किन्नू की खुशबू फैलती है, तो श्रीगंगानगर और पंजाब के बागानों में रौनक छा जाती है। यह रसीला और मीठा फल न केवल स्वाद का राजा है, बल्कि हजारों किसानों की आजीविका का आधार भी। किन्नू की खेती मुख्य रूप से पंजाब और राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में होती है, जहां अनुकूल जलवायु, नहरों की सिंचाई और उपजाऊ मिट्टी इसे विशेष गुणवत्ता प्रदान करती है। इस सीजन में श्रीगंगानगर रिकॉर्ड उत्पादन की ओर बढ़ रहा है, जबकि पंजाब में कुछ चुनौतियां हैं, लेकिन कुल मिलाकर किन्नू का कारोबार चमकदार भविष्य दिखा रहा है।

किन्नू का बढ़ता उत्पादन

इस वर्ष 2025-26 सीजन में श्रीगंगानगर जिले में किन्नू का उत्पादन ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ने वाला है। जिले के लगभग 16 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैले बगीचों से 3.10 लाख मीट्रिक टन से अधिक उत्पादन की उम्मीद है। यहां का गंगानगरी किन्नू अपनी अनोखी मिठास, रसीलेपन और बड़े आकार के लिए देश-विदेश में मशहूर है। किसानों को इस बार 20-25 रुपये प्रति किलो तक की अच्छी कीमत मिलने की संभावना है।दूसरी ओर, पंजाब में इस सीजन उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की कमी अनुमानित है। सामान्यतः पंजाब में 59 हजार हेक्टेयर क्षेत्र से सालाना 12 लाख टन किन्नू होता है, लेकिन मौसमी प्रभाव से इस बार कम रह सकता है। फिर भी, पंजाब देश का सबसे बड़ा किन्नू उत्पादक है, जो कुल राष्ट्रीय उत्पादन का बड़ा हिस्सा देता है। दोनों क्षेत्र मिलकर भारत के किन्नू उत्पादन में 80-90 प्रतिशत योगदान देते हैं।

फैक्टरियों की खरीद और प्रोसेसिंग की रौनक

किन्नू की फसल दिसंबर से फरवरी तक कटाई के बाद बाजारों में पहुंचती है। फैक्टरियां और व्यापारी बड़े पैमाने पर खरीद करते हैं। पंजाब में सरकारी एजेंसियां जैसे पंजाब एग्रो सी ग्रेड किन्नू को जूस बनाने के लिए खरीदती हैं, जिससे किसानों को नुकसान कम होता है। श्रीगंगानगर में भी निजी फैक्टरियां और व्यापारी सक्रिय हैं।प्रोसेसिंग के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। किन्नू से जूस, नेक्टर, स्क्वैश, जैम, कैंडी और पील ऑयल जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं। वैक्सिंग और ग्रेडिंग यूनिट्स फल की शेल्फ लाइफ बढ़ाती हैं, जिससे निर्यात आसान होता है। पंजाब और राजस्थान में दर्जनों प्रोसेसिंग यूनिट्स काम कर रही हैं, लेकिन बड़े पैमाने की फैक्टरियां बढ़ाने की जरूरत है ताकि पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस कम हो और किसानों को बेहतर दाम मिलें।

कारोबारी संभावनाएं और भविष्य

किन्नू का कारोबार सालाना सैकड़ों करोड़ का है। ताजा फल के अलावा प्रोसेस्ड उत्पादों की मांग बढ़ रही है। निर्यात मध्य पूर्व, गल्फ देशों, रूस, कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान तक पहुंच रहा है। वैल्यू एडिशन से जूस और अन्य प्रोडक्ट्स विदेशी बाजारों में अच्छी कीमत पर बिक सकते हैं।किसान अब ड्रिप इरिगेशन, हाई डेंसिटी प्लांटिंग और ऑर्गेनिक तरीके अपनाकर उत्पादन बढ़ा रहे हैं। सरकार की योजनाएं और नई प्रोसेसिंग यूनिट्स से यह फल किसानों की आय दोगुनी करने का माध्यम बन सकता है। चुनौतियां जैसे मौसम की अनिश्चितता और मार्केटिंग हैं, लेकिन सही नवाचार से किन्नू का भविष्य और भी मीठा होगा।श्रीगंगानगर और पंजाब का किन्नू न केवल फल है, बल्कि समृद्धि की मिठास है जो पूरे क्षेत्र को रोशन कर रहा है।

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