सरकारी योजनाओं को लेकर किसानों के मन में लंबे समय से एक ही सवाल रहा है, क्या ये योजनाएँ सच में खेत तक पहुँचती भी हैं, या सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाती हैं?
बरसों तक किसानों ने योजनाओं के नाम तो सुने, लेकिन लाभ लेने की प्रक्रिया इतनी जटिल रही कि भरोसा धीरे-धीरे कमजोर होता गया।

हालांकि, राजस्थान के कुछ जिलों में अब यह तस्वीर बदलती दिख रही है। फसल बीमा योजना, कृषि यंत्रों पर सब्सिडी, सूक्ष्म सिंचाई व्यवस्था और उन्नत बीज सहायता जैसी योजनाओं ने किसानों को खेती के जोखिम से लड़ने की ताकत दी है।
जहां पहले एक खराब मौसम पूरे साल की मेहनत पर पानी फेर देता था, अब किसान को कम से कम आर्थिक सुरक्षा का भरोसा है।
ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं से पानी की बचत हुई है, वहीं कृषि यंत्रों पर सब्सिडी ने छोटे किसानों के लिए आधुनिक खेती को संभव बनाया है। बीज सहायता योजनाओं ने उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार किया है, जिससे किसानों को बेहतर उपज और दाम मिलने लगे हैं।
फिर भी चुनौतियाँ पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। कई किसानों को आज भी योजनाओं की सही जानकारी नहीं मिल पाती। आवेदन प्रक्रियाएँ जटिल हैं और कई बार भुगतान में देरी से किसान निराश हो जाते हैं।
लेकिन जहाँ किसान जागरूक हुआ, पंचायत और कृषि विभाग से जुड़ाव बढ़ा, वहाँ योजनाएँ सिर्फ सरकारी घोषणा नहीं रहीं, बल्कि खेत में काम आती दिखीं।
यह कहानी इस बात की गवाही देती है कि जब नीति और किसान के बीच भरोसे की खाई कम होती है, जब जानकारी और पहुँच मजबूत होती है, तब खेती केवल गुज़ारे का साधन नहीं रह जाती, वह किसान के भविष्य की मजबूत नींव बन जाती है।


