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मिट्टी से जुड़ा स्टार्टअप: राजस्थान के युवा किसानों की नई राह

गाँव मंच डेस्क जयपुर। एक समय था जब गांव का युवा खेती छोड़कर शहर जाना ही सफलता की पहचान माना जाता था। खेतों को पिछड़ापन और नौकरी को भविष्य समझा जाता था।
लेकिन राजस्थान के कई गांवों में यह सोच तेजी से बदल रही है। अब युवा खेती को मजबूरी नहीं, बल्कि प्रयोग और संभावनाओं की प्रयोगशाला मानकर अपना रहे हैं।

आज का युवा किसान हल के साथ-साथ मोबाइल भी संभालता है। खेत की मिट्टी जांच से लेकर मौसम का पूर्वानुमान, मंडी भाव से लेकर फसल की मार्केटिंग, सब कुछ अब तकनीक से जुड़ चुका है। ड्रोन से फसल की निगरानी, मोबाइल ऐप से सिंचाई की योजना और सोशल मीडिया से सीधे ग्राहक तक पहुंच, ये सब अब कुछ चुनिंदा नहीं, बल्कि बढ़ती हुई वास्तविकता है।

कई युवा किसान परंपरागत फसलों के साथ प्रयोग कर रहे हैं। कोई औषधीय पौधे उगा रहा है, तो कोई सब्ज़ियों की हाई-वैल्यू किस्मों पर काम कर रहा है। कुछ युवाओं ने जैविक खेती और ब्रांडिंग को जोड़कर अपनी फसल को सीधे बाजार में पहचान दिलाई है। इन नवाचारों ने खेती का गणित बदल दिया है। अब खेती सिर्फ मौसम के भरोसे नहीं चलती, बल्कि डेटा, योजना और मार्केट की समझ से आगे बढ़ती है। युवा किसान जोखिम से डरते नहीं, बल्कि उसे तकनीक और जानकारी से कम करने की कोशिश करते हैं।

इस बदलाव का असर गांवों की सामाजिक संरचना पर भी पड़ा है। जो युवा पहले शहरों में अस्थायी काम कर रहे थे, वे अब गांव लौटकर खेती को सम्मानजनक व्यवसाय बना रहे हैं।
खेती अब उनके लिए सिर्फ आय का जरिया नहीं, पहचान और आत्मनिर्भरता का साधन बन रही है।

यह कहानी उस पीढ़ी की है जो मिट्टी से जुड़ी है, लेकिन नजर भविष्य पर रखती है।
जहां खेत अब सिर्फ मेहनत की जगह नहीं रहे, वे प्रयोगशाला बन गए हैं, और किसान नवाचार के वैज्ञानिक।

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