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जयपुर में प्रदेश का पहला लिविंग विल काउंसलिंग सेंटर शुरू होगा, बीएमसीएच में मिलेगी मार्गदर्शन सुविधा

जयपुर। गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीज की चिकित्सा संबंधी इच्छाओं और गरिमा को प्राथमिकता देने की दिशा में जयपुर स्थित भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल (बीएमसीएच) एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रहा है। अस्पताल में प्रदेश का पहला लिविंग विल काउंसलिंग सेंटर शुरू किया जाएगा। इस केंद्र के माध्यम से लोगों को लिविंग विल के कानूनी एवं चिकित्सकीय पहलुओं, इसे तैयार करने की प्रक्रिया और जरूरी औपचारिकताओं के बारे में जानकारी दी जाएगी।

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, सेंटर की शुरुआत 10 अक्टूबर को विश्व हॉस्पिस एवं पैलिएटिव केयर डे के अवसर पर की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य लोगों को समय रहते अपनी चिकित्सा संबंधी इच्छाओं पर विचार करने और भविष्य की गंभीर परिस्थितियों के लिए तैयारी करने के प्रति जागरूक करना है।

क्या है लिविंग विल और क्यों है जरूरी?

  • लिविंग विल एक ऐसा अग्रिम चिकित्सा निर्देश है, जिसके माध्यम से कोई वयस्क व्यक्ति भविष्य में अपनी
  • गंभीर चिकित्सा स्थिति के संबंध में उपचार से जुड़ी इच्छाएं पहले से व्यक्त कर सकता है।
  • यदि किसी समय वह स्वयं निर्णय लेने या अपनी इच्छा बताने में सक्षम नहीं रहता, तो लागू कानूनी प्रक्रिया
  • और चिकित्सा परिस्थितियों के अनुसार इन निर्देशों पर विचार किया जा सकता है।
  • इसके माध्यम से व्यक्ति यह स्पष्ट कर सकता है कि अपरिवर्तनीय गंभीर स्थिति में वह किस प्रकार के जीवन रक्षक उपचारों
  • के संबंध में अपनी इच्छा दर्ज करना चाहता है। इसमें वेंटिलेटर या अन्य जीवन रक्षक उपायों से संबंधित निर्देश भी शामिल हो सकते हैं।
  • लिविंग विल का उद्देश्य मृत्यु को चुनना नहीं, बल्कि व्यक्ति की स्वायत्तता, गरिमा
  • और पहले से व्यक्त चिकित्सा संबंधी इच्छाओं का सम्मान सुनिश्चित करना है।

10 अक्टूबर से शुरू होगी काउंसलिंग सुविधा

  • अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, लिविंग विल काउंसलिंग सेंटर में
  • पूर्व पंजीकरण के आधार पर लोगों को मार्गदर्शन दिया जाएगा।
  • यह सुविधा केवल गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों तक सीमित नहीं होगी,
  • बल्कि स्वस्थ व्यक्तियों को भी अपनी चिकित्सा संबंधी
  • इच्छाओं पर समय रहते विचार करने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
  • अस्पताल के अधिशासी निदेशक मेजर जनरल एस.सी. पारीक ने बताया कि केंद्र में काउंसलिंग के लिए पहले से पंजीकरण कराना होगा।
  • अस्पताल की चिकित्सा निदेशक डॉ. गीतांजलि अग्रवाल जोशी के अनुसार, काउंसलिंग की जिम्मेदारी हॉस्पिस एवं पैलिएटिव केयर
  • विभाग की निदेशक डॉ. अंजुम खान जोड़ निभाएंगी। वह इस विषय पर काम कर रहे संबंधित क्लीनिकों और विशेषज्ञों के संपर्क में हैं,
  • ताकि लोगों को उपलब्ध अनुभव और प्रक्रियाओं के आधार पर उचित जानकारी मिल सके।

राजस्थान सरकार के साथ प्रक्रिया पर चर्चा

  • इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने राजस्थान सरकार के चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं
  • परिवार कल्याण विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ से मुलाकात की। बैठक में लिविंग विल की
  • प्रक्रिया को प्रदेश में व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने और आवश्यक सरकारी औपचारिकताओं पर चर्चा की गई।
  • अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, प्रमुख शासन सचिव ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे सामाजिक
  • और मानवीय दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया तथा सरकार की ओर से सहयोग का आश्वासन दिया।
  • इस संबंध में माह के अंत तक अस्पताल प्रबंधन और राज्य सरकार के बीच संयुक्त बैठक प्रस्तावित है।

भविष्य के कठिन फैसलों के लिए पहले से तैयारी

कई बार गंभीर बीमारी के दौरान मरीज स्वयं अपनी इच्छा व्यक्त नहीं कर पाता।

ऐसी स्थिति में परिवार के सदस्यों को उपचार से जुड़े कठिन निर्णय लेने पड़ सकते हैं। लिविंग विल के प्रति जागरूकता इस विषय पर परिवार और डॉक्टरों के बीच पहले से संवाद स्थापित करने में मदद कर सकती है।

व्यक्ति और उसके परिवार को कुछ महत्वपूर्ण सवालों पर समय रहते विचार करना चाहिए:

  • यदि मैं स्वयं निर्णय लेने में सक्षम नहीं रहूं, तो मेरी चिकित्सा संबंधी इच्छाएं डॉक्टरों तक कैसे पहुंचेंगी?
  • गंभीर और अपरिवर्तनीय बीमारी की स्थिति में मैं किन उपचारों के बारे में अपनी प्राथमिकताएं दर्ज करना चाहता हूं?
  • क्या मैंने अपनी इच्छाओं और चिंताओं पर परिवार के साथ खुलकर चर्चा की है?

इन सवालों पर बातचीत से भविष्य में उत्पन्न होने वाली अनिश्चितता को कम करने और मरीज की इच्छाओं को समझने में मदद मिल सकती है।

मरीज की गरिमा और इच्छाओं को प्राथमिकता

  • लिविंग विल का मूल उद्देश्य चिकित्सा संबंधी निर्णयों में मरीज की स्वायत्तता और गरिमा को महत्व देना है।
  • गंभीर बीमारी के दौरान परिवार के सदस्यों पर भावनात्मक दबाव हो सकता है।
  • पहले से व्यक्त चिकित्सा संबंधी इच्छाएं ऐसी परिस्थितियों में मार्गदर्शन दे सकती हैं।
  • हालांकि, लिविंग विल का उपयोग लागू कानून, निर्धारित प्रक्रियाओं और मरीज की वास्तविक चिकित्सा स्थिति के अनुसार ही किया जा सकता है।
  • यह डॉक्टरों की चिकित्सकीय जिम्मेदारियों या कानूनी प्रक्रियाओं का विकल्प नहीं है।

बुजुर्गों और परिवारों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

  • बढ़ती उम्र के साथ कई लोगों को हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर और सांस संबंधी दीर्घकालिक बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।
  • ऐसी परिस्थितियों में उपचार की प्राथमिकताओं पर समय रहते चर्चा करना मरीज, परिवार और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उपयोगी हो सकता है।
  • लिविंग विल के बारे में जानकारी होने से परिवारों को मरीज की पहले से व्यक्त इच्छाओं को समझने में मदद मिल सकती है।
  • इससे कठिन चिकित्सा परिस्थितियों में निर्णय लेने से जुड़े मानसिक दबाव को कम करने में भी सहायता मिल सकती है।
  • अस्पतालों में भी उपचार संबंधी निर्णय मरीज की स्थिति, चिकित्सकीय लाभ, उपलब्ध संसाधनों और लागू दिशा-निर्देशों के आधार पर लिए जाते हैं।
  • लिविंग विल की स्पष्ट समझ मरीज-केंद्रित चिकित्सा देखभाल को बढ़ावा देने में सहायक हो सकती है।

लिविंग विल से जुड़े कानूनी दिशा-निर्देश

  • भारत में लिविंग विल और अग्रिम चिकित्सा निर्देशों को कानूनी मान्यता देने से संबंधित महत्वपूर्ण
  • फैसला सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में कॉमन कॉज बनाम भारत संघ मामले में दिया था।
  • बाद में न्यायालय ने 2023 में प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए दिशा-निर्देशों में संशोधन किया।
  • लिविंग विल तैयार करने की प्रक्रिया और उसके उपयोग से संबंधित नियमों को समझने के लिए नागरिकों को आधिकारिक कानूनी
  • दिशा-निर्देशों तथा विशेषज्ञों से जानकारी लेनी चाहिए।
  • इस दिशा में भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल की प्रस्तावित पहल राजस्थान में लिविंग विल के बारे में जागरूकता बढ़ाने
  • और लोगों को चिकित्सा संबंधी इच्छाओं पर समय रहते विचार करने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास है।

गांवमंच डेस्क

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।

https://www.sci.gov.in/document/guidelines-06-aug-2018

https://www.who.int/en/news-room/fact-sheets/detail/noncommunicable-diseases

Edited by – Krishika Agarwal

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