जयपुर, 9 अक्टूबर। राजस्थान में गंभीर और असाध्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों तथा बिस्तर पर रहने को मजबूर बुजुर्गों को घर पर ही स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर सेवाओं का विस्तार कर रही है। सरकारी जानकारी के अनुसार, इस पहल के तहत करीब सवा साल में तीन लाख से अधिक मरीजों को लाभ मिला है।
इस योजना का उद्देश्य ऐसे मरीजों को राहत पहुंचाना है, जिनके लिए बार-बार अस्पताल जाना मुश्किल होता है। घर पर ही नर्सिंग केयर, फिजियोथेरेपी, आवश्यक दवाइयां और मानसिक एवं सामाजिक सहयोग जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इससे मरीजों के साथ उनके परिवारों को भी देखभाल में सहायता मिल रही है।

क्या है होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर?
- होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर ऐसी स्वास्थ्य सेवा है, जिसमें गंभीर या लंबे समय से बीमार मरीजों
- को उनकी जरूरत के अनुसार घर पर देखभाल और राहत उपलब्ध कराई जाती है।
- इसका उद्देश्य केवल बीमारी के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि दर्द और अन्य तकलीफों को कम करना,
- मानसिक सहयोग देना तथा मरीज के जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाना भी है।
- राजस्थान में कैंसर, पार्किंसन, स्ट्रोक, रीढ़ की चोट, अल्जाइमर और अन्य गंभीर बीमारियों से प्रभावित मरीजों को
- इस तरह की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह सुविधा विशेष रूप से उन बुजुर्गों और मरीजों के लिए उपयोगी है,
- जिन्हें चलने-फिरने या अस्पताल पहुंचने में परेशानी होती है।
2.51 लाख मरीजों को ओपीडी और 41 हजार से अधिक को आईपीडी सेवाएं
राज्य सरकार के अनुसार, अप्रैल 2025 से अगस्त 2026 तक प्रदेश में पेलिएटिव केयर सेवाओं के तहत बड़ी संख्या में मरीजों को उपचार और परामर्श दिया गया।
- करीब 2.51 लाख मरीजों को पेलिएटिव केयर ओपीडी सेवाएं मिलीं।
- 41 हजार से अधिक मरीजों को आईपीडी में भर्ती कर उपचार एवं देखभाल प्रदान की गई।
- 98 जिला, उप जिला और सैटेलाइट अस्पतालों में पेलिएटिव केयर क्लिनिक स्थापित किए जा चुके हैं।
- गंभीर मरीजों को विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध कराने के लिए टेली-कंसल्टेशन की सुविधा भी दी जा रही है।
टेली-कंसल्टेशन के माध्यम से मरीजों को जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श मिल सकता है। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सलाह लेने के लिए लंबी दूरी तय करने की परेशानी कम करने में मदद मिलती है।
चार महीने में 43 हजार मरीजों को घर पर देखभाल
- राजस्थान सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त 2026 तक करीब 43 हजार मरीजों
- को होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर की सुविधा दी गई। इनमें लगभग 20 हजार बुजुर्ग मरीज शामिल हैं।
- प्रदेश में जुलाई 2025 से घर आधारित पेलिएटिव केयर सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है।
- इसके तहत मरीजों की जरूरत के अनुसार नर्सिंग सेवाएं, फिजियोथेरेपी, आवश्यक दवाइयां और मानसिक, सामाजिक
- एवं आध्यात्मिक परामर्श उपलब्ध कराया जाता है।
- इस पहल से मरीजों को अस्पताल आने-जाने की परेशानी से राहत मिल सकती है।
- साथ ही, परिवार के सदस्यों को अपने प्रियजनों की देखभाल के दौरान आवश्यक चिकित्सकीय सहयोग प्राप्त होता है।
‘राहत की किरण’ वाहन से मरीजों के घर पहुंचेगी स्वास्थ्य टीम
- होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर को प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने ‘राहत की किरण’ वाहन के
- माध्यम से मरीजों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की पहल की है।
- इस वाहन में आवश्यक दवाइयों के साथ प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी मरीजों के घर पहुंचते हैं।
- टीम में नर्सिंग ऑफिसर, फिजियोथेरेपिस्ट और संबंधित क्षेत्र की एएनएम या आशा कार्यकर्ता शामिल रहती हैं।
- टीम मरीज की जरूरत के अनुसार घर पर देखभाल उपलब्ध कराती है।
- आवश्यकता होने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों से टेली-परामर्श की सुविधा भी प्रदान की जाती है।
- इस व्यवस्था का उद्देश्य मरीजों को उनके घर के नजदीक आवश्यक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराना है।
57 हजार केयर गिवर्स को दिया गया प्रशिक्षण
पेलिएटिव केयर सेवाओं के विस्तार के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है। राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, अब तक करीब 57 हजार केयर गिवर्स को होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
इसके अतिरिक्त:
- लगभग 10 हजार एएनएम को प्रशिक्षण दिया गया है।
- 21 हजार से अधिक आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है।
- करीब 10 हजार सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को प्रशिक्षण दिया गया है।
सरकार का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करना है, ताकि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी गंभीर मरीजों तथा बुजुर्गों को आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराई जा सके।
गांवों के स्वास्थ्य केंद्रों तक सेवाओं का विस्तार
- राजस्थान सरकार का लक्ष्य पेलिएटिव केयर सेवाओं को बड़े अस्पतालों तक सीमित रखने के बजाय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों
- और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाना है।
- इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गंभीर मरीजों को भी उनकी जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
- घर पर देखभाल और स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों की सहायता से परिवारों को भी मरीज की देखभाल के लिए आवश्यक मार्गदर्शन मिल सकता है।
गंभीर मरीजों के लिए राहत और सम्मानजनक देखभाल पर जोर
- होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर का महत्व केवल चिकित्सा सहायता तक सीमित नहीं है।
- गंभीर बीमारी से प्रभावित व्यक्ति को दर्द से राहत, भावनात्मक सहयोग और सम्मानजनक देखभाल मिलना भी जरूरी है।
- राजस्थान में इस कार्यक्रम के माध्यम से मरीजों के घर तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
- यदि इन सेवाओं का विस्तार प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक प्रभावी रूप से होता है,
- तो इससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों और उनके परिवारों को भी लाभ मिल सकता है।
गांवमंच डेस्क
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Edited by – Riddhima


