जयपुर, 9 अक्टूबर। राजस्थान में संचालित डिजिटल परियोजनाओं और ई-गवर्नेंस व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के लिए पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों का 33 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल जयपुर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने भामाशाह डेटा सेंटर में आयोजित कार्यशाला में हिस्सा लेकर राज्य की डिजिटल सेवाओं, डेटा प्रबंधन, नेटवर्क संचालन और साइबर सुरक्षा से जुड़ी तकनीकी व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की।
यह दो दिवसीय अध्ययन दौरा विभिन्न राज्यों के बीच डिजिटल शासन के क्षेत्र में अनुभव साझा करने और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान राजस्थान की डिजिटल परियोजनाओं को दूसरे राज्यों में लागू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।

पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के अधिकारी हुए शामिल
- केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में संयुक्त सचिव (डिजिटल गवर्नेंस) एवं
- राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी नंद कुमारम के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल जयपुर पहुंचा।
- इस प्रतिनिधिमंडल में असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के 25 अधिकारी शामिल हुए।
- इनके अलावा राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के आठ अधिकारियों ने भी अध्ययन दौरे में हिस्सा लिया।
- कार्यशाला के दौरान अधिकारियों को राजस्थान की प्रमुख डिजिटल व्यवस्थाओं और उनके संचालन से जुड़ी तकनीकी प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई।
भामाशाह डेटा सेंटर और नेटवर्क व्यवस्थाओं का अध्ययन
भामाशाह डेटा सेंटर में आयोजित कार्यशाला के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान की डिजिटल आधारभूत संरचना के विभिन्न पहलुओं को समझा। इसमें प्रमुख रूप से निम्न व्यवस्थाएं शामिल रहीं:
- भामाशाह डेटा सेंटर: डेटा के सुरक्षित प्रबंधन और डिजिटल सेवाओं के संचालन से संबंधित व्यवस्था।
- नेटवर्क संचालन केंद्र: नेटवर्क की निगरानी और सुचारु संचालन से जुड़ी तकनीकी प्रक्रिया।
- सुरक्षा संचालन केंद्र: डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा और निगरानी से संबंधित व्यवस्था।
- राजस्थान राज्यव्यापी क्षेत्र नेटवर्क (आरस्वान): सरकारी कार्यालयों के बीच नेटवर्क कनेक्टिविटी की व्यवस्था।
- राजनेट: राज्य की डिजिटल कनेक्टिविटी और नेटवर्क संबंधी व्यवस्थाओं का अध्ययन।
प्रतिनिधिमंडल ने इन प्रणालियों के तकनीकी पहलुओं और अन्य राज्यों में इनके उपयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया।
डिजिटल शासन के लिए राज्यों के बीच सहयोग जरूरी
- कार्यशाला को संबोधित करते हुए संयुक्त सचिव नंद कुमारम ने कहा कि डिजिटल शासन
- की सफलता केवल किसी राज्य की आर्थिक स्थिति या उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर नहीं करती।
- इसके लिए मजबूत तकनीकी व्यवस्था, स्पष्ट कार्ययोजना और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
- उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों में पहले से सफलतापूर्वक संचालित डिजिटल परियोजनाओं के
- अनुभवों का लाभ उठाकर नई व्यवस्थाओं को कम समय और बेहतर संसाधन प्रबंधन के साथ लागू किया जा सकता है।
- उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की भूमिका केवल तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है।
- इसका प्रभाव स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी सेवाओं पर भी पड़ता है।
पूर्वोत्तर राज्यों में ई-ऑफिस व्यवस्था के विस्तार पर जोर
- नंद कुमारम ने पूर्वोत्तर राज्यों में ई-ऑफिस व्यवस्था को ब्लॉक स्तर तक विस्तारित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
- उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यम से प्रशासनिक कार्यों को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाया जा सकता है।
- ई-ऑफिस व्यवस्था के विस्तार से सरकारी कार्यालयों में फाइलों के निस्तारण, दस्तावेजों के प्रबंधन
- और विभागीय समन्वय में तेजी लाने में सहायता मिल सकती है।
- इससे आमजन की समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया को भी बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
परिवार आधारित डिजिटल डेटाबेस से योजनाओं में मिलेगी मदद
- कार्यशाला में परिवार आधारित डिजिटल डेटाबेस की उपयोगिता पर भी चर्चा हुई।
- नंद कुमारम ने बताया कि ऐसे डेटाबेस सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की पहचान करने
- और लाभ वितरण में होने वाली त्रुटियों को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
- इसके साथ ही समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के डिजिटल विश्लेषण के महत्व पर भी जोर दिया गया।
- ऐसे विश्लेषण से विभिन्न क्षेत्रों में सामने आने वाली जनसमस्याओं की पहचान करने
- और संबंधित विभागों तक समय पर जानकारी पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
आपदा के समय डेटा सेंटर के वैकल्पिक उपयोग पर चर्चा
- कार्यशाला में डेटा सेंटर जैसी तकनीकी सुविधाओं के बेहतर उपयोग और आपदा प्रबंधन से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया गया।
- नंद कुमारम ने पूर्वोत्तर राज्यों के लिए आपदा की स्थिति में राजस्थान के डेटा सेंटर को
- वैकल्पिक केंद्र के रूप में उपयोग करने की संभावनाओं पर चर्चा की।
- उन्होंने कहा कि डिजिटल परियोजनाओं को लागू करने से पहले उनकी लागत, समयसीमा, आवश्यक मानव संसाधन
- और अपेक्षित लाभ का स्पष्ट आकलन करना जरूरी है। इसके अलावा तकनीकी संस्थानों की क्षमता बढ़ाने
- और विभिन्न विभागों के अनुभवी अधिकारियों को जोड़ने की आवश्यकता भी बताई।
10 अक्टूबर को जन आधार और राजस्थान संपर्क 181 का दौरा
- दो दिवसीय अध्ययन दौरे के दूसरे दिन, शनिवार 10 अक्टूबर को प्रतिनिधिमंडल योजना भवन स्थित आर्थिक
- एवं सांख्यिकी निदेशालय का दौरा करेगा। यहां अधिकारी जन आधार योजना की कार्यप्रणाली और उससे जुड़ी डिजिटल व्यवस्थाओं का अध्ययन करेंगे।
- इसके बाद प्रतिनिधिमंडल सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क 181 पहुंचेगा।
- यहां अधिकारी जनशिकायतों के पंजीकरण, निगरानी और समाधान की डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त करेंगे।
- कार्यशाला में सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग के तकनीकी निदेशक अखिलेश मित्तल सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
गांवमंच डेस्क
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Edited by – Krishika Agarwal


