गांव मंच डेस्क, नई दिल्ली। पपीते की खेती आज किसानों के लिए कम समय में अधिक मुनाफा देने वाली फसल बनती जा रही है। कच्चा हो या पका दोनों ही रूपों में पपीते की बाजार में जबरदस्त मांग रहती है। यही वजह है कि सही समय पर इसकी बुवाई किसानों की आमदनी को कई गुना बढ़ा सकती है।
साल में तीन बार होती है पपीते की खेती
किसान गुंजेश गंजन के अनुसार, पपीते की खेती साल में तीन बार की जा सकती है फरवरी के अंतिम सप्ताह और मार्च की शुरुआत में वही
जुलाई और सितंबर में पपीते की खेती की सकती है हालांकि किसान गुंजेश ने किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा यदि आपका क्षेत्र बाढ़ ग्रस्त है, तो जुलाई में पपीते की बुवाई बिल्कुल न करें, क्योंकि अधिक पानी से पौधों को भारी नुकसान हो सकता है।
पपीता लगाने का सबसे अच्छा समय कौन सा?
किसान गुंजेश ने बताया की पपीते की खेती के लिए सबसे उत्तम समय फरवरी के अंतिम सप्ताह से मार्च तक माना जाता है। इस दौरान मौसम अनुकूल रहता है, जिससे पौधों की ग्रोथ बेहतर होती है और फल अधिक मात्रा में लगते हैं। सितंबर में की गई बुवाई अपेक्षाकृत कम फायदेमंद साबित होती है।
पपीते की खेती की सबसे बड़ी खासियत
किसान गुंजेश के अनुसार पपीते की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी बाजार में इतनी ज्यादा मांग है कि किसानों को मंडी तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। पपीता सीधे खेत से ही अच्छे दामों पर बिक जाता है।
कब मिलती है सबसे ज्यादा कीमत
किसान गुंजेश के अनुसार पपीते की सबसे ज्यादा कीमत गर्मी में मिलती है इस समय फिलहाल बाजार में पपीते का भाव लगभग 40 रुपये प्रति किलो चल रहा है। गर्मी के मौसम में इसकी मांग और बढ़ जाती है, जिससे कीमतों में भी इजाफा होता है। अगर किसान मार्च में बुवाई करते हैं, तो मई तक फल तैयार हो जाते हैं, और इसी समय बाजार में पपीते के सबसे ज्यादा दाम मिलते हैं।


