किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल : डॉ. किरोड़ी लाल मीणा
सवाई माधोपुर, 16 जनवरी।
देश में पहली बार अमरूद महोत्सव का आयोजन सवाई माधोपुर में होने जा रहा है। यह आयोजन जिले के 263वें स्थापना दिवस के अवसर पर बाघ महोत्सव के साथ किया जा रहा है, जो न केवल सवाई माधोपुर बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। राज्य के कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने इसे किसानों की आय बढ़ाने और जिले की कृषि पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया है।
डॉ. मीणा ने बताया कि अमरूद महोत्सव एवं उन्नत कृषि तकनीकी मेला–2026 का शुभारंभ 18 जनवरी को प्रातः 11:00 बजे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के मुख्य आतिथ्य में किया जाएगा। यह आयोजन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत, उनकी उपज और सवाई माधोपुर की कृषि क्षमता को राष्ट्रीय मंच देने का सशक्त प्रयास है।
कृषि मंत्री ने कहा कि अमरूद महोत्सव सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि किसानों के भविष्य को मजबूत करने की दूरदर्शी पहल है। सवाई माधोपुर सहित प्रदेश के किसान उच्च गुणवत्ता का अमरूद उत्पादन कर रहे हैं, जिसकी मांग देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में आवश्यक है कि किसानों को बेहतर तकनीक, बाजार और उचित मूल्य से जोड़ा जाए, ताकि उनकी आय में वास्तविक वृद्धि हो सके।
उन्होंने बताया कि यह दो दिवसीय आयोजन किसानों के लिए ज्ञान, नवाचार और अवसरों का बड़ा मंच बनेगा। महोत्सव के दौरान आधुनिक खेती, स्मार्ट फार्मिंग, कृषि यंत्रीकरण, ड्रोन तकनीक, हाई-टेक बागवानी, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन से जुड़ी नई तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया जाएगा। प्रतिदिन हजारों किसान इस मंच से जुड़कर खेती को अधिक लाभकारी बनाने के आधुनिक तरीके सीख सकेंगे।

अमरूद की मिठास को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की पहल
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने सवाई माधोपुर के अमरूद को प्रदेश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का संकल्प लिया था। अमरूद महोत्सव उसी संकल्प की पहली ठोस शुरुआत है। इस पहल से स्थानीय किसानों, बागवानों और युवाओं को नई तकनीकों, बाजार की समझ और मूल्य संवर्धन की महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी, जिससे वे अपनी आय बढ़ाने में सक्षम होंगे।
उन्होंने बताया कि सवाई माधोपुर जिले में वर्तमान में 15 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में अमरूद की खेती हो रही है। यहां प्रतिवर्ष लगभग 4 लाख मीट्रिक टन अमरूद का उत्पादन होता है, जिससे 6 से 7 अरब रुपये का कारोबार होता है। इस संभावनाशील क्षेत्र को संगठित मंच प्रदान कर वैज्ञानिकों, व्यापारियों और किसानों के बीच सीधा संवाद स्थापित करना ही अमरूद महोत्सव का मुख्य उद्देश्य है।
कृषि, तकनीक और व्यापार का संगम
कृषि मंत्री ने बताया कि महोत्सव में अमरूद की विभिन्न किस्मों की प्रदर्शनी, फल-फूल प्रतियोगिताएं और देश के विभिन्न राज्यों की 20 से अधिक नर्सरियों की भागीदारी रहेगी। लगभग 200 स्टॉल्स के माध्यम से कृषि यंत्र, उद्यानिकी तकनीक, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, पशुपालन और डेयरी गतिविधियों के लाइव डेमोंस्ट्रेशन आयोजित किए जाएंगे।
इसके साथ ही अमरूद से बनने वाले वैल्यू-एडेड उत्पादों—जैसे जूस, जैली, स्क्वैश, पल्प, बर्फी, चटनी और आचार—की भी व्यापक प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिससे किसानों को प्रसंस्करण और अतिरिक्त आय के नए अवसरों की जानकारी मिलेगी।
डॉ. मीणा ने कृषक–वैज्ञानिक संवाद और क्रेता–विक्रेता संगोष्ठी को महोत्सव की आत्मा बताते हुए कहा कि इससे किसान, वैज्ञानिक और उद्योगपति एक ही मंच पर संवाद कर सकेंगे। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी, किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिलेगा और सवाई माधोपुर के अमरूद के निर्यात के नए द्वार खुलेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले बजट में भी राज्य सरकार अमरूद की खेती और उसके प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान करेगी।
जनभागीदारी से बनेगा ऐतिहासिक आयोजन
कृषि मंत्री ने कहा कि सवाई माधोपुर की असली ताकत उसकी मिट्टी, मेहनतकश किसान और स्थानीय उत्पाद हैं। अमरूद जिले की वास्तविक संपदा है। जब किसान, युवा और उद्यमी विकास की प्रक्रिया से जुड़ते हैं, तभी आत्मनिर्भर और सशक्त सवाई माधोपुर का निर्माण संभव होता है।
उन्होंने प्रदेश भर के किसानों, युवाओं, उद्यमियों और आमजन से अपील की कि वे अमरूद महोत्सव में सक्रिय सहभागिता करें और इस आयोजन को ऐतिहासिक सफलता दिलाएं। यह महोत्सव सवाई माधोपुर की कृषि पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का बड़ा अवसर है।


