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10 साल से मुआवजे का इंतजार, बेंगलुरु में विधानसभा के बाहर किसान ने लगाया फंदा

करोड़ के मुआवजे को 62 लाख करने का आरोप, पुलिस ने समय रहते बचाई जान

गांव मंच डेस्क, कर्नाटक | राजधानी बेंगलुरु में उस समय हड़कंप मच गया जब एक किसान ने विधानसभा परिसर के बाहर पेड़ पर चढ़कर आत्महत्या की कोशिश की। किसान ने अपने गमछे का फंदा बनाकर पेड़ की शाखा से लटका लिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और उसे सुरक्षित नीचे उतार लिया।

हाईवे परियोजना के लिए अधिग्रहित हुई थी जमीन

चिकमगलूर जिले के किसान विश्वकुमार का कहना है कि वर्ष 2016 में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने सड़क विस्तार परियोजना के लिए उनकी करीब 1.5 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। इस जमीन पर बड़ी संख्या में चंदन के पेड़ भी मौजूद थे, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये आंकी गई थी।

62 करोड़ की जगह 62 लाख करने का आरोप

किसान का आरोप है कि शुरुआती आकलन में उन्हें करीब 62 करोड़ रुपये मुआवजा मिलने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में वन विभाग की मूल्यांकन रिपोर्ट में यह राशि घटाकर मात्र 62 लाख रुपये कर दी गई। इसके बाद मामला विवादों में फंस गया और आज तक उन्हें कोई भुगतान नहीं मिला।

10 साल से अधिकारियों के चक्कर काट रहा किसान

विश्वकुमार का कहना है कि वह पिछले एक दशक से मुआवजे के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है। कई बार अधिकारियों और संबंधित विभागों से गुहार लगाने के बावजूद उसे कोई ठोस जवाब नहीं मिला। किसान ने कहा कि उसे सिर्फ आश्वासन मिले, लेकिन आज तक एक रुपया भी नहीं मिला।

कर्नाटक विधानसभा के बाहर किसान का अनोखा विरोध।

पहले भी कर चुका है विरोध प्रदर्शन

यह पहली बार नहीं है जब किसान ने अपनी मांग को लेकर विरोध जताया हो। दो साल पहले भी उसने विधानसभा परिसर के पीछे लगे एक चंदन के पेड़ को काटकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की थी। किसान का कहना है कि लगातार हो रही अनदेखी और मुआवजे में देरी ने उसे यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया।

पुलिस ने सुरक्षित उतारा

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। काफी समझाइश के बाद किसान को सुरक्षित नीचे उतारा गया और पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन ले जाया गया। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

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