गाँव मंच डेस्क बीकानेर: एक वक्त था जब ऊँट राजस्थान की शान था। लेकिन समय बदला, सड़कें बनीं, गाड़ियाँ आईं और ऊँट धीरे-धीरे बोझ माना जाने लगा।

कई किसानों ने ऊँट बेच दिए, कई ने पालन ही छोड़ दिया। पर आज वही ऊँटनी किसान की उम्मीद बनकर लौट रही है।
बीकानेर, नागौर और चूरू के रेगिस्तानी इलाकों में ऊँटनी के दूध ने नई आर्थिक राह खोली है।
यह दूध सिर्फ एक उत्पाद नहीं, बल्कि परंपरा और विज्ञान का संगम है। औषधीय गुणों से भरपूर यह दूध अब शहरी बाजारों में खास पहचान बना चुका है।
किसानों ने ऊँटनी के दूध को संगठित रूप से बेचना शुरू किया है। साफ-सफाई, ठंडा भंडारण और समय पर आपूर्ति ने ग्राहकों का भरोसा जीता है।
जहां पहले ऊँट पालना घाटे का सौदा था, आज वही परिवार सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।


