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विकसित भारत 2047 के लिए कृषि में वैज्ञानिक नवाचार की नई दिशा

ग्राम मंच डेस्क, दिल्ली में कृषि का भविष्य अब केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिक नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जैव प्रौद्योगिकी खेती को नई दिशा दे रहे हैं। इन तकनीकों से किसानों की समस्याओं का समाधान खोजने में मदद मिल सकती है।

ESTIC-2026 में दिखेगी भारत की वैज्ञानिक क्षमता

नई दिल्ली के भारत मंडपम में 27 से 29 अक्टूबर 2026 तक ESTIC-2026 आयोजित होगा। यह सम्मेलन विज्ञान, तकनीक और नवाचार पर केंद्रित रहेगा। इसमें वैज्ञानिक संस्थान, उद्योग, विशेषज्ञ और नीति निर्माता शामिल होंगे। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) भी इसमें अपनी उपलब्धियाँ प्रस्तुत करेगी।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बदलेगी खेती

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीक खेती को अधिक सटीक बना सकती हैं। मिट्टी के आंकड़ों से पोषक तत्वों की जरूरत समझने में मदद मिलेगी। किसान सिंचाई, उर्वरक और फसल चयन के बेहतर फैसले ले सकेंगे।

जैव प्रौद्योगिकी से मजबूत होगी आत्मनिर्भरता

  • जैव प्रौद्योगिकी और जीनोमिक्स फसल सुधार के नए अवसर खोल रहे हैं।
  • इनके माध्यम से रोग प्रतिरोधक क्षमता और उपयोगी गुणों पर शोध संभव है।
  • पशुधन स्वास्थ्य में भी स्वदेशी अनुसंधान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
  • अफ्रीकन स्वाइन फीवर के लिए विकसित हो रहा MA-104 सेल-आधारित टीका इसका उदाहरण है।
  • बदलता मौसम किसानों के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी कर रहा है।
  • अनियमित बारिश, बढ़ता तापमान और पानी की कमी खेती को प्रभावित करते हैं।
  • जलवायु-अनुकूल फसलें इन जोखिमों को कम करने में मदद कर सकती हैं।
  • जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और मृदा स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना होगा।

https://icar.org.in

https://www.estic2026.in

Edited by- Krishika Agarwal

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