गाँव मंच डेस्क, जयपुर में भारतीय लोक परंपरा, साधना और रामकथा की विरासत पर विशेष चर्चा हुई। झालाना संस्थानिक क्षेत्र स्थित राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति के सभागार में पाठक पर्व का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जापानी फिल्मकार साकुराको आबे ने भारतीय संस्कृति से अपने जुड़ाव को साझा किया।
भारत और हिंदी भाषा से जुड़ा रिश्ता
साकुराको आबे ने भारत और हिंदी भाषा के प्रति अपनी रुचि के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वह भारत को करीब से जानना चाहती थीं। इसी रुचि ने उन्हें भारतीय कला और लोक संस्कृति के करीब पहुंचाया। मिथिला चित्रकला की एक प्रदर्शनी के दौरान उनकी मुलाकात प्रसिद्ध चित्रकार गंगादेवी से हुई।
साधना और रोजमर्रा के जीवन का संबंध
आबे ने भारतीय लोक परंपराओं के संदर्भ में पार्वती बाउल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बाउल केवल गायक नहीं होता। वह एक साधक भी होता है। शूटिंग के दौरान उन्हें बाउल परंपरा के आध्यात्मिक पक्ष को समझने का अवसर मिला। उन्होंने साधना को केवल पूजा या धार्मिक गतिविधि तक सीमित नहीं माना।
पार्वती बाउल पर डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन

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Edited by- Riddhima


