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फसल बीमा फर्जीवाड़ा खुलासा: किरोड़ी लाल मीणा की बड़ी कार्रवाई

गांव मंच डेस्क, हनुमानगढ़/पल्लू 7 मई। राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत एक सनसनीखेज फसल बीमा फर्जीवाड़ा खुलासा हुआ है। कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने हनुमानगढ़ जिले की पल्लू स्थित SBI शाखा में अचानक छापा मारकर करीब 9 करोड़ रुपये के फर्जी बीमा क्लेम के खेल को उजागर किया। मंत्री की इस त्वरित कार्रवाई से करोड़ों रुपये की राशि गलत हाथों में जाने से पहले ही रोक दी गई है।

फर्जी किसानों का बनाया गया नेटवर्क

प्राथमिक जांच के बाद हुए फसल बीमा फर्जीवाड़ा खुलासा में सामने आया कि 162 बाहरी व्यक्तियों के नाम पर बचत खाते खोले गए थे। इन लोगों को कागजों में “ऋणी किसान” दर्शाया गया और खरीफ 2025 की मूंगफली फसल का फर्जी बीमा कर दिया गया। इस पूरी साजिश में फर्जी खसरा और मुरब्बा नंबरों का इस्तेमाल कर राजस्व रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ की गई थी।

फसल बीमा फर्जीवाड़ा खुलासा किरोड़ी लाल मीणा पल्लू हनुमानगढ़

तहसील रिपोर्ट में हुआ बड़ा पर्दाफाश

कृषि मंत्री द्वारा करवाई गई गजनेर तहसील प्रशासन की जांच में यह फसल बीमा फर्जीवाड़ा खुलासा और पुख्ता हो गया। रिपोर्ट के अनुसार, जिन व्यक्तियों के नाम पर करोड़ों का क्लेम तैयार था, उनके नाम संबंधित गांवों में कोई भूमि दर्ज ही नहीं है। सिस्टम में अपलोड किए गए सभी भूमि दस्तावेज पूरी तरह फर्जी पाए गए।

दोषियों पर होगी सख्त कार्यवाही

पल्लू स्थित बैंक शाखा में हुई इस कार्रवाई के बाद किरोड़ी लाल मीणा ने बैंक प्रबंधन से सख्त सवाल किए। मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि संबंधित शाखा प्रबंधक और बैंक कर्मियों के खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज हो। साथ ही, सभी संदिग्ध बैंक खातों को तत्काल फ्रीज किया जाए और बीमा कंपनी के अधिकारियों की भूमिका की भी गहन जांच की जाए।

उठे व्यवस्था पर गंभीर सवाल

इस बड़े फसल बीमा फर्जीवाड़ा खुलासा ने बैंकिंग और बीमा सत्यापन प्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना भूमि सत्यापन के बीमा कैसे स्वीकृत हुआ और बैंक ने पात्रता की जांच क्यों नहीं की, इसकी विस्तृत रिपोर्ट राज्य स्तर पर तलब की जा रही है। माना जा रहा है कि इसमें किसी बड़े संगठित नेटवर्क का हाथ हो सकता है।

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की पात्रता और नियमों की जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल पर जाएं।
  • राजस्थान सरकार के कृषि विभाग द्वारा जारी नई गाइडलाइंस को कृषि विभाग राजस्थान की वेबसाइट पर देखा जा सकता है।

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नोट:- यह विचार लेखक पत्रकार अंकित तिवारी Ankit Tiwari के है।

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