जयपुर समाचार डिजिटल युग में हाथ से लिखे पत्रों की भावनात्मक अहमियत और साहित्यिक विरासत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जयपुर में राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर और ‘पाती अपनों को’ मुहिम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में पत्र लेखन की प्रासंगिकता, सामाजिक संबंधों और नई पीढ़ी को इस परंपरा से जोड़ने पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में तीन पुस्तकों का विमोचन किया गया तथा 26 विद्यार्थियों, 20 प्रधानाचार्यों और पत्र लेखकों को सम्मानित किया गया।
डिजिटल दौर में हस्तलिखित पत्रों की बढ़ती प्रासंगिकता
जयपुर स्थित आंबेडकर वेलफेयर सोसाइटी में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का विषय ‘डिजिटल दौर में हाथ से लिखे पत्रों की भूमिका’ रहा। देशभर से आए साहित्यकारों, लेखकों, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों ने पत्र लेखन की परंपरा को जीवंत बनाए रखने तथा नई पीढ़ी को इससे जोड़ने के विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए।
‘पाती अपनों को’ मुहिम के संयोजक, साहित्यकार एवं राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी डॉ. सूरज सिंह नेगी ने कहा कि जीवन में धन-संपदा और पद-प्रतिष्ठा से अधिक महत्वपूर्ण रिश्तों की मजबूती है। आज के समय में आपसी संवाद को मजबूत बनाने और संबंधों को सहेजने की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में दुनिया ग्लोबल विलेज बन गई है, लेकिन भावनात्मक स्तर पर लोग अपने करीबियों से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में हाथ से लिखी चिट्ठियां रिश्तों में जमी बर्फ को पिघलाने का प्रभावी माध्यम बन सकती हैं। पत्रों के माध्यम से व्यक्ति अपनी भावनाओं, संवेदनाओं और आत्मीयता को जिस तरह व्यक्त करता है, उससे मानवीय संबंधों में नई गर्माहट आ सकती है।
आठ वर्षों से पत्र लेखन परंपरा को जीवंत रखने की मुहिम
डॉ. सूरज सिंह नेगी ने बताया कि लुप्त होती पत्र लेखन विधा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से पिछले आठ वर्षों से ‘पाती अपनों को’ मुहिम संचालित की जा रही है। इस दौरान 24 अखिल भारतीय पत्र लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया और 17 पुस्तकों का प्रकाशन हुआ है।
उन्होंने बताया कि अब तक साढ़े तीन लाख से अधिक हस्तलिखित पत्र प्राप्त हो चुके हैं। इनमें ढाई लाख से अधिक पत्र स्कूली विद्यार्थियों ने लिखे हैं। यह सहभागिता दर्शाती है कि नई पीढ़ी में भी भावनात्मक अभिव्यक्ति और पत्र लेखन के प्रति रुचि विकसित करने की पर्याप्त संभावनाएं हैं।
घर, परिवार और शिक्षण संस्थानों में पत्र लेखन को प्रोत्साहन देने पर जोर
- संगोष्ठी के प्रथम सत्र की अध्यक्षता भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय,
- नई दिल्ली की अतिरिक्त सचिव श्रीमती मीनाक्षी रावत ने की। उन्होंने घर, परिवार, समाज
- और शिक्षण संस्थानों में हस्तलिखित पत्रों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
- उन्होंने कहा कि बच्चों को पत्र लेखन के महत्व से परिचित कराया जाना चाहिए
- और उन्हें अपनी भावनाओं तथा विचारों को लिखित रूप में व्यक्त करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
- कार्यक्रम की मुख्य अतिथि फरीदाबाद की लेखिका एवं पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. इंदू गुप्ता ने भी हाथ से लिखे पत्रों की उपयोगिता को रेखांकित किया।
- वहीं, जयपुर के रतन कुमार सांभरिया ने हिंदी साहित्य में पत्रों के योगदान का उल्लेख करते हुए इन्हें साहित्य की अनमोल धरोहर बताया।
- ग्वालियर की लेखिका एवं आकाशवाणी ग्वालियर की पूर्व प्रोग्रामर सीमा जैन
- ने हस्तलिखित पत्रों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे।
- उन्होंने बच्चों को ‘पाती अपनों को’ मुहिम से जोड़ने की पहल को सराहनीय बताया।
- संगोष्ठी में भोपाल की लता अग्रवाल, अजमेर की डॉ. छाया शर्मा और डॉ. सुधा मित्तल, बूंदी की उम्मेहबीबा जिलानी,
- श्रीगंगानगर की शमिंद्र कौर तथा जोधपुर की डॉ. शालिनी गोयल सहित कई लेखकों ने पत्रों का वाचन किया।
- वक्ताओं ने मुहिम से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए पत्र लेखन के भावनात्मक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला।
तीन पुस्तकों का विमोचन, पत्र लेखन की यात्रा को मिला दस्तावेजी रूप
- कार्यक्रम के दूसरे सत्र में पत्र लेखन और ‘पाती अपनों को’ मुहिम पर आधारित तीन पुस्तकों का विमोचन किया गया।
- इन पुस्तकों के माध्यम से सामाजिक सरोकारों, पारिवारिक रिश्तों और पत्र लेखन अभियान की यात्रा को सामने रखा गया।
- ‘पेड़ हमारे जीवनदाता’ पुस्तक में स्कूली बच्चों द्वारा अपने अभिभावकों को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से लिखे गए पत्रों का संकलन है।
- यह पुस्तक पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में बच्चों की भूमिका को रेखांकित करती है।
- ‘लिख दी चिट्ठियां माई को’ पुस्तक में 109 पत्र लेखकों द्वारा अपनी मां को लिखे गए पत्र शामिल हैं।
- इन पत्रों के माध्यम से मां के प्रति प्रेम, सम्मान, कृतज्ञता और भावनात्मक जुड़ाव को अभिव्यक्त किया गया है।
- ‘पाती अपनों को मुहिम (एक अनवरत यात्रा)’ डॉ. सूरज सिंह नेगी और प्रो. मीना सिरोला
- द्वारा पिछले आठ वर्षों में संचालित मुहिम के प्रयासों, अनुभवों और उपलब्धियों का दस्तावेज है।
- द्वितीय सत्र की अध्यक्षता आईआईटी मुंबई की मानविकी पीठ के विभागाध्यक्ष प्रो. विक्रम सिंह सिरोला ने की।
- इस अवसर पर जयपुर के डॉ. बजरंग सोनी और ‘नारी कभी न हारी’ संस्थान की संस्थापिका बीना चौहान विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
- अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रो. विक्रम सिंह सिरोला ने ‘पाती अपनों को’ मुहिम को मील का पत्थर बताते हुए
- कहा कि परिवारों में आपसी संवाद और आत्मीय संबंधों को बनाए रखने में एक-दूसरे को हाथ से लिखे पत्र भेजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
26 विद्यार्थियों और 20 प्रधानाचार्यों सहित पत्र लेखकों का सम्मान
- राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान पत्र लेखन, सामाजिक जागरूकता और ‘पाती अपनों को’ मुहिम में सहभागिता के लिए
- 26 स्कूली विद्यार्थियों तथा 20 प्रधानाचार्यों को सम्मानित किया गया। उन्हें प्रशस्ति पत्र, सम्मान राशि और पुस्तकें भेंट की गईं।
- इसके अतिरिक्त ‘लिख दी चिट्ठियां माई को’ पुस्तक में योगदान देने वाले 109 पत्र
- लेखकों को भी प्रशस्ति पत्र और पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया गया।
- कार्यक्रम में देशभर से आए साहित्यकारों, लेखकों, विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
- मुहिम की सह-संयोजिका प्रो. मीना सिरोला सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी और आमजन भी उपस्थित रहे।
भावनात्मक संवाद को मजबूत बनाने का संदेश
- जयपुर में आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी ने डिजिटल माध्यमों के बीच
- हस्तलिखित पत्रों की भावनात्मक उपयोगिता को फिर से रेखांकित किया।
- कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि पत्र लेखन केवल संवाद का माध्यम नहीं,
- बल्कि रिश्तों को सहेजने, संवेदनाओं को व्यक्त करने
- और नई पीढ़ी में लेखन के प्रति रुचि विकसित करने का भी एक प्रभावी तरीका है।
- ‘पाती अपनों को’ जैसी पहल के माध्यम से पत्र लेखन की परंपरा को आगे बढ़ाने
- और सामाजिक संबंधों में आत्मीयता बनाए रखने का संदेश दिया गया।
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Edited by – Krishika Agarwal


