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कमजोर मानसून और अल नीनो से रबी फसलों पर संकट, कृषि विकास दर के अनुमान घटे

गाँव मंच डेस्क, देश में मानसून की विदाई और अल नीनो की परिस्थितियों ने कृषि क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। आगामी रबी सीजन में मिट्टी की नमी की कमी बड़ी चुनौती बन सकती है। इसका असर गेहूं, सरसों और चने जैसी प्रमुख फसलों पर पड़ सकता है। किसानों के लिए समय पर बुवाई और पर्याप्त सिंचाई महत्वपूर्ण होगी।

रबी फसलों के सामने नमी का संकट

रबी फसलों की बुवाई मुख्य रूप से अक्टूबर से दिसंबर के बीच होती है। इन फसलों की शुरुआती बढ़वार के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी जरूरी है। मानसून की वापसी के बाद खेतों में नमी कम होने का खतरा रहता है। ऐसे में सिंचाई पर किसानों की निर्भरता बढ़ सकती है।

कृषि विकास दर के अनुमान में कटौती

मौसम से जुड़ी चुनौतियों ने कृषि विकास के अनुमानों को प्रभावित किया है। ICRA और वैश्विक शोध एजेंसियों ने कृषि वृद्धि को लेकर सतर्कता दिखाई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में संशोधित अनुमानों के सटीक आंकड़े नहीं दिए गए हैं। इसलिए संभावित गिरावट की मात्रा स्पष्ट नहीं है।

किसानों के लिए जरूरी तैयारी

  • रबी फसलों का प्रदर्शन देश की खाद्य आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है।
  • गेहूं, सरसों और दलहन का उत्पादन किसानों की आय से भी जुड़ा है।
  • यदि पैदावार प्रभावित होती है, तो कृषि बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है।
  • हालांकि, वास्तविक असर मौसम और फसल उत्पादन के आंकड़ों से ही स्पष्ट होगा।

https://www.icra.in

https://mausam.imd.gov.in

Edited by- Krishika Agarwal

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