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राजस्थान की ‘एकजिला, एकउत्पाद’ नीति 2024: स्थानीय उद्योगों को मिलेगी नई ताकत

गाँव मंच डेस्क जयपुर | राजस्थान सरकार ने अपनी “एक जिला, एक उत्पाद” (ODOP) नीति 2024 की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक जिले के विशिष्ट उत्पादों को बढ़ावा देना, स्थानीय उद्योगों को सशक्त करना और राज्यभर में स्थाई रोजगार के अवसर पैदा करना है। इस नीति के तहत, राज्य के सभी 41 जिलों के विशिष्ट उत्पादों की पहचान की गई है, और उन्हें एक ब्रांड के रूप में विकसित किया जाएगा।

एक जिला, एक उत्पाद नीति का उद्देश्य उद्यमिता को प्रोत्साहित करना, उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार लाना और बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और ब्रांडिंग के जरिए बाजार तक पहुंच बढ़ाना है। यह नीति राजस्थान में आर्थिक विकास के समावेशी मॉडल को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक कौशल और स्वदेशी उद्योगों का लाभ उठाने का प्रयास करती है।

यह योजना भारत सरकार द्वारा 2018 में शुरू की गई थी, जिसमें हर जिले से एक विशिष्ट उत्पाद की पहचान कर उसे वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया था। राजस्थान ने इस नीति को अपने राज्य में लागू करके उसे और प्रभावी रूप से लागू किया है।

राजस्थान सरकार का सहयोग और वित्तीय प्रोत्साहन

राजस्थान सरकार के उद्योग और वाणिज्य आयुक्त ने इस नीति के बारे में बताते हुए कहा, “राजस्थान की एक जिला, एक उत्पाद नीति 2024 स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देती है। वित्तीय सहायता के साथ-साथ प्रौद्योगिकी, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच प्रदान करके हम जिला स्तर के उद्यमियों को बढ़ावा दे रहे हैं और उन्हें प्रतिस्पर्धा करने के लिए सशक्त बना रहे हैं।”

इसके अंतर्गत, सूक्ष्म उद्यमों के लिए 15 लाख रुपये तक 25% और छोटे उद्यमों के लिए योग्य परियोजना लागत पर 20 लाख रुपये तक 15% की कैपिटल सब्सिडी दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भाग लेने के लिए भी उद्यमियों को सहायता प्रदान करने का प्रावधान रखा है। इसमें स्टॉल का किराया और 2 लाख रुपये तक की यात्रा सहायता दी जाएगी।

इस नीति के अंतर्गत क्लस्टर विकास के लिए सहयोग प्रदान किया जाएगा और सामान्य सुविधा केंद्रों की स्थापना की जाएगी, ताकि उत्पादों को एक साथ एकत्रित करके उनका सामूहिक विकास किया जा सके।

गुणवत्ता प्रमाणपत्रों और डिजिटल मार्केटिंग में भी मिलेगा समर्थन

राजस्थान की इस नीति के तहत राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणपत्रों और बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के लिए 3 लाख रुपये तक 75% पुनर्भरण प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उत्पादों को सूचीबद्ध करने के लिए दो साल तक प्रति वर्ष 1 लाख रुपये तक 75% पुनर्भरण की सुविधा भी दी जाएगी।

टेक्नोलॉजिकल अपग्रेडेशन को बढ़ावा देने के लिए इस नीति के तहत मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय संस्थानों से सॉफ्टवेयर और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी खरीदने पर 5 लाख रुपये तक की 50% सब्सिडी दी जाएगी। साथ ही, ई-कॉमर्स वेबसाइटों के लिए कैटलॉगिंग सेवाओं और वेबसाइट डेवलपमेंट के लिए 60% और अधिकतम 75,000 रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी।

स्थानीय उद्योगों की मजबूती के लिए डिजिटल मार्केटिंग पर जोर

राजस्थान सरकार की यह नीति स्थानीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धा और मार्केट तक पहुंच को बढ़ाने के लिए डिजिटल मार्केटिंग को भी प्राथमिकता दे रही है। इसके अंतर्गत, डिजिटल प्लेटफार्मों पर व्यवसायों को स्थापित करने और ऑनलाइन ब्रांडिंग को बढ़ावा देने के लिए सहायता दी जा रही है। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि राजस्थान के उत्पाद न केवल भारत के भीतर बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान बनाए।

समावेशी विकास और रोजगार सृजन

राजस्थान की यह नीति स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को सशक्त बनाकर न केवल राज्य की सांस्कृतिक और शिल्प विरासत को संरक्षित करने का प्रयास करती है, बल्कि इसे आर्थिक मजबूती भी प्रदान करती है। इस नीति से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की संभावनाओं में वृद्धि होगी और राज्य को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।

राजस्थान सरकार का उद्देश्य इस नीति के माध्यम से स्थानीय उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना और उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में स्थायी पहचान दिलवाना है।

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