गांव मंच डेस्क, जयपुर।
राजस्थान सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि प्रदेश में प्रत्येक मातृ मृत्यु की घटना अत्यंत संवेदनशील है और सरकार हर मामले की गंभीरता से समीक्षा कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को मातृ स्वास्थ्य से जुड़े सभी प्रोटोकॉल की शत-प्रतिशत पालना सुनिश्चित करने तथा हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं।
मातृ मृत्यु दर में 15 अंकों की कमी
- चिकित्सा मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में मातृ मृत्यु दर (MMR) में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
- सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) 2022-24 के अनुसार राजस्थान में मातृ मृत्यु दर घटकर 87 प्रति एक लाख जीवित जन्म हो गई है।
- वर्तमान सरकार के कार्यकाल में इसमें लगभग 15 अंकों की कमी दर्ज की गई है।
- उन्होंने बताया कि प्रदेश में संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 94.1 प्रतिशत तक पहुंच चुका है,
- जो राष्ट्रीय औसत से लगभग 4 प्रतिशत अधिक है।
- इसे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का सकारात्मक परिणाम माना जा रहा है।

भीलवाड़ा और बांसवाड़ा मामलों की जांच जारी
- स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हाल ही में भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में प्रसूताओं की मृत्यु
- के मामलों की निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार जांच और समीक्षा कराई जा रही है।
- अब तक की जांच में चिकित्सकीय लापरवाही का कोई स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है।
- उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या
- चिकित्सा प्रोटोकॉल के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों
- और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हाई रिस्क गर्भवतियों पर रहेगा विशेष फोकस
- गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में ऐसे मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं
- जिन्हें निजी अस्पतालों से गंभीर या जटिल स्थिति में रेफर किया जाता है।
- इनमें हाई रिस्क प्रेग्नेंसी, अत्यधिक रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप, गंभीर एनीमिया, हृदय रोग
- और अन्य जटिल बीमारियों से पीड़ित गर्भवती महिलाएं शामिल होती हैं।
- उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम प्रत्येक मरीज का उपचार स्थापित चिकित्सा मानकों
- और प्रोटोकॉल के अनुसार करती है। सिजेरियन प्रसव सहित सभी जटिल मामलों में मां
- और नवजात दोनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहती है।
सभी अस्पतालों को प्रोटोकॉल की पालना के निर्देश
- स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी सरकारी चिकित्सा संस्थानों को मातृ
- स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन करने, हाई रिस्क गर्भवती
- महिलाओं की समय पर पहचान करने, नियमित मॉनिटरिंग करने और जरूरत पड़ने
- पर समयबद्ध रेफरल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि इन निर्देशों की नियमित निगरानी भी की जा रही है। इसके अलावा उप स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित मातृ स्वास्थ्य एवं शिशु पोषण दिवस तथा प्रत्येक माह 9, 18 और 27 तारीख को आयोजित होने वाले प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं को बनाया जा रहा और मजबूत
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने हाल ही में जोधपुर और बीकानेर सहित विभिन्न चिकित्सा संस्थानों का निरीक्षण कर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान चिन्हित कमियों को दूर करने और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में चिकित्सा आधारभूत संरचना का विस्तार, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, आधुनिक चिकित्सा उपकरण, आवश्यक दवाओं की आपूर्ति, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की ट्रैकिंग और समयबद्ध रेफरल प्रणाली को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
गर्भवती महिलाओं से नियमित जांच कराने की अपील
गजेंद्र सिंह खींवसर ने प्रदेशवासियों से अपील की कि गर्भवती महिलाएं समय-समय पर प्रसव पूर्व जांच अवश्य कराएं। यदि गर्भावस्था के दौरान किसी भी प्रकार की जटिलता महसूस हो तो तुरंत निकटतम सीएचसी, पीएचसी या सरकारी अस्पताल में संपर्क करें।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक गर्भवती महिला और नवजात को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
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Edited by – Riddhima


