गावं मंच डेस्क, जयपुर 06 मई | राजस्थान अब गैर-पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राजस्थान ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार लगातार नए कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य ने सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन में नए रिकॉर्ड बनाए हैं। पिछले दो वित्तीय वर्षों में राज्य ने 12 हजार 647 करोड़ यूनिट से अधिक गैर-पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन किया है।
राज्य सरकार के मुताबिक वर्ष 2024-25 में राजस्थान का गैर-पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन 5 हजार 735 करोड़ यूनिट से अधिक पहुंच गया। वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा 6 हजार 912 करोड़ यूनिट के पार हो चुका है। लगातार बढ़ता उत्पादन यह संकेत देता है कि राजस्थान ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत आधार तैयार कर चुका है।
सौर ऊर्जा उत्पादन में राजस्थान सबसे आगे
राजस्थान ने देश में “सोलर कैपिटल ऑफ इंडिया” के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है। राज्य में सालभर भरपूर धूप मिलने के कारण सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी रहती हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में राज्य का सौर ऊर्जा उत्पादन 4 हजार 910 करोड़ यूनिट से अधिक रहा। वहीं, 2025-26 में यह बढ़कर 5 हजार 992 करोड़ यूनिट से ज्यादा हो गया। राजस्थान ऊर्जा आत्मनिर्भरता अभियान में सौर ऊर्जा सबसे बड़ा आधार बनकर उभरी है।

पवन और बायोमास ऊर्जा में भी बढ़ोतरी
सौर ऊर्जा के अलावा पवन, बायोमास और हाइड्रो ऊर्जा उत्पादन में भी तेजी आई है। जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर जैसे पश्चिमी जिलों में पवन ऊर्जा की बड़ी संभावनाएं हैं।
पिछले दो वर्षों में राज्य ने पवन ऊर्जा से 1 हजार 428 करोड़ यूनिट से अधिक बिजली उत्पादन किया। इसके अलावा बायोमास से 117 करोड़ यूनिट, लघु हाइड्रो से 1 करोड़ यूनिट और बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट्स से 197 करोड़ यूनिट से ज्यादा बिजली उत्पादन दर्ज किया गया।
सरकार की नीतियों से मिला बढ़ावा
राज्य सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए कई फैसले लिए हैं। सोलर पार्क विस्तार, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और निजी निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इसके साथ ही केंद्र सरकार की योजनाओं का भी प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना और प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसी योजनाओं से राजस्थान को बड़ा फायदा मिला है।
राजस्थान ने प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत 4 हजार 27 मेगावाट स्थापित सौर क्षमता का आंकड़ा पार कर लिया है। वहीं राज्य की कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 41 हजार मेगावाट से अधिक हो चुकी है।
देश की ऊर्जा जरूरतों में भी बढ़ रहा योगदान
राजस्थान अब केवल अपनी जरूरतों तक सीमित नहीं है। राज्य देश की ऊर्जा मांग पूरी करने में भी अहम भूमिका निभा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में राजस्थान ग्रीन एनर्जी हब के रूप में और मजबूत होगा।
राजस्थान ऊर्जा आत्मनिर्भरता अभियान के तहत राज्य सरकार का लक्ष्य हरित ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना और भविष्य में देश का प्रमुख ऊर्जा प्रदाता बनना है।
- राजस्थान में सोलर और ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स से जुड़ी जानकारी के लिए राजस्थान ऊर्जा विभाग
- प्रधानमंत्री कुसुम योजना और सौर ऊर्जा सब्सिडी की पूरी जानकारी यहां देखें PM Kusum Yojana
- नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से जुड़े अपडेट्स के लिए Ministry of New and Renewable Energy
- राजस्थान में औद्योगिक और ऊर्जा निवेश अवसरों की जानकारी यहां उपलब्ध है RIICO Rajasthan
नोट:- यह विचार लेखक पत्रकार अंकित तिवारी Ankit Tiwari के है।


