गाँव मंच । जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ते जल संकट के बीच किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। Regenerative Agriculture Study United Way Mumbai द्वारा India Climate Action Project (ICAP) के तहत किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि Regenerative Agriculture यानी पुनर्योजी कृषि पद्धतियां अपनाने से मिट्टी की नमी बनाए रखने की क्षमता में 40 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। इसके साथ ही फसलों की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।
यह अध्ययन महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित मराठवाड़ा क्षेत्र के धाराशिव जिले में किया गया।
ICAP, HSBC के सहयोग से शुरू की गई तीन वर्षीय शोध और कार्यान्वयन परियोजना है,
जिसका उद्देश्य भारत में जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है। परियोजना विशेष रूप से मिट्टी के स्वास्थ्य, जल संरक्षण और जैव विविधता पर केंद्रित है।
किसानों को मिला सीधा लाभ
Regenerative Agriculture Study
अध्ययन के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल लगभग 59 प्रतिशत किसानों ने बताया कि Regenerative Agriculture
अपनाने के बाद उनकी फसलों की गुणवत्ता में सुधार हुआ। वहीं, खेतों में मिट्टी की नमी बनाए रखने की क्षमता भी पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई।
इसके अलावा, शोध में यह भी पाया गया कि पुनर्योजी कृषि पद्धतियों और पर्यावरणीय स्वास्थ्य संकेतकों के बीच सकारात्मक संबंध मौजूद है।
इससे यह संकेत मिलता है कि ये तकनीकें केवल उत्पादन ही नहीं बढ़ातीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

खेती की लागत में आई कमी
Regenerative Agriculture Study
रिपोर्ट के अनुसार, किसानों ने जीवामृत और दशपर्णी जैसे स्थानीय स्तर पर तैयार किए जाने वाले जैविक इनपुट का उपयोग किया। परिणामस्वरूप रासायनिक उर्वरकों और अन्य महंगे संसाधनों पर निर्भरता कम हुई। इससे खेती की लागत में कमी दर्ज की गई।
साथ ही, मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होने से फसलों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी। इसके कारण कीटों और बीमारियों से होने वाले नुकसान में कमी आई तथा श्रम लागत भी घटी। इससे किसानों की कुल आय और खेती की दक्षता में सुधार देखने को मिला।
बाजार और प्रशिक्षण की भूमिका अहम
हालांकि अध्ययन में यह भी कहा गया है कि Regenerative Agriculture को बड़े स्तर पर अपनाने के लिए केवल तकनीकी बदलाव पर्याप्त नहीं हैं। किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना, प्रशिक्षण देना और Farmer Producer Organisations (FPOs) को मजबूत बनाना भी जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों को उचित बाजार और संस्थागत सहयोग मिले, तो यह मॉडल जल संकट वाले क्षेत्रों में खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बना सकता है।
कुल मिलाकर, ICAP का यह अध्ययन दर्शाता है कि Regenerative Agriculture न केवल पर्यावरण संरक्षण में मददगार है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, लागत घटाने और खेती को भविष्य के लिए सुरक्षित बनाने का एक प्रभावी विकल्प भी बन सकता है।
United Way Mumbai: https://www.unitedwaymumbai.org
HSBC India: https://www.hsbc.co.in
Food and Agriculture Organization (FAO): https://www.fao.org
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https://yourwebsite.com/climate-change-impact-on-indian-agriculture
Riddhima


