गांव मंच जयपुर, डेस्क | 20 अप्रैल उच्च मूल्य बागवानी फसलें भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को तेजी से बदल रही हैं। पिछले एक दशक में कृषि क्षेत्र ने लगभग 4.45% की दर से वृद्धि दर्ज की है। इस ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ा योगदान बागवानी क्षेत्र का रहा है।
अब खेती केवल अनाज तक सीमित नहीं रही। किसान फल, सब्जी, मसाले और फूलों जैसी फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। इन फसलों से कम जमीन में ज्यादा मुनाफा मिल रहा है।
बागवानी बना कृषि विकास का मजबूत आधार
बागवानी क्षेत्र कृषि उत्पादन में लगभग 37% योगदान देता है।
पिछले वर्षों में इसका उत्पादन तेजी से बढ़ा है।
- 2013-14: 277 मिलियन टन
- 2024-25: 370 मिलियन टन
इसमें शामिल हैं:
- 117 मिलियन टन फल
- 217 मिलियन टन सब्जियां
इससे साफ है कि उच्च मूल्य बागवानी फसलें किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत स्थिति
भारत दुनिया में:
- फल और सब्जी उत्पादन में दूसरा स्थान रखता है
- प्याज उत्पादन में पहला स्थान रखता है
यह संकेत देता है कि भारत की बागवानी फसलें वैश्विक बाजार में तेजी से मजबूत हो रही हैं।
क्षेत्र आधारित खेती को मिलेगा बढ़ावा
केंद्रीय बजट 2026-27 में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए खास फसलें तय की गई हैं:
- तटीय क्षेत्र: नारियल, काजू, कोको
- उत्तर-पूर्व: अगरवुड
- पहाड़ी क्षेत्र: अखरोट, बादाम
इससे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार खेती को बढ़ावा मिलेगा।
नारियल और काजू सेक्टर में बड़ा अवसर
भारत में नारियल खेती से करीब 3 करोड़ लोग जुड़े हैं।
2024-25 में नारियल उत्पादन 13.97 मिलियन टन रहा।
काजू खेती भी तेजी से बढ़ रही है:
- 12 लाख हेक्टेयर क्षेत्र
- 8 लाख टन उत्पादन
यह फसल बंजर जमीन को भी उपयोगी बना देती है।
कोको और चंदन से बढ़ेगी आय
कोको खेती अब नारियल और सुपारी के साथ की जा रही है।
इससे किसानों को अतिरिक्त आय मिल रही है।
वहीं, चंदन एक हाई वैल्यू फसल है।
इससे निर्यात और रोजगार दोनों बढ़ सकते हैं।
उत्तर-पूर्व में अगरवुड का बड़ा बाजार
अगरवुड को “ऊद” भी कहा जाता है।
यह इत्र और औषधि में इस्तेमाल होता है।
- 150 मिलियन पेड़ भारत में
- 90% उत्तर-पूर्व में
इसका बाजार तेजी से बढ़ रहा है।
पहाड़ी क्षेत्रों में मेवा खेती का विस्तार
हिमालयी क्षेत्रों में नट्स की खेती बढ़ रही है:
- अखरोट उत्पादन: 3.22 लाख टन
- बादाम उत्पादन: 13.94 हजार टन
यह फसलें किसानों को हाई वैल्यू रिटर्न देती हैं।
अधिक जानकारी के लिए आप इन स्रोतों को देख सकते हैं:
- Ministry of Agriculture and Farmers Welfare की आधिकारिक वेबसाइट
- National Horticulture Board से बागवानी डेटा
- Food and Agriculture Organization की ग्लोबल रिपोर्ट
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