गांवमंच डेस्क, जयपुर।
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस के अवसर पर आयोजित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के ‘आरोहण’ कार्यक्रम में युवाओं को राष्ट्र निर्माण का संदेश दिया। जयपुर के एस.एस. जैन सुबोध आर्ट्स एवं कॉमर्स कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी राष्ट्रीय पूंजी है और राष्ट्र का भविष्य सशक्त, संस्कारित तथा कर्तव्यनिष्ठ विद्यार्थियों पर निर्भर करता है। वासुदेव देवनानी राष्ट्र निर्माण संदेश
उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे देश को नई दिशा दें, राष्ट्र को मजबूत बनाएं और समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील रहें। साथ ही अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहने का भी संदेश दिया।
भारतीय संस्कृति के अनुरूप हो एआई का उपयोग
- वासुदेव देवनानी ने कहा कि विद्यार्थी सामाजिक परिवर्तन के सबसे बड़े वाहक हैं।
- आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग भारतीय संस्कृति, परंपरा
- और जीवन मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपने कार्यों
- की निरंतर समीक्षा करने और उसी आधार पर भविष्य की दिशा तय करने का आग्रह किया।

स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी प्रासंगिक
- उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायक विचारों
- को याद करने का अवसर है। विवेकानंद का चरित्रवान और राष्ट्रनिष्ठ युवा भारत के
- निर्माण का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने कहा
- कि आत्मविश्वास, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति ही युवाओं की सबसे बड़ी ताकत है। वासुदेव देवनानी राष्ट्र निर्माण संदेश
विद्यार्थी जीवन के अनुभव किए साझा
- अपने विद्यार्थी जीवन का उल्लेख करते हुए देवनानी ने बताया कि राष्ट्रीय
- स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई।
- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय रहते हुए उन्हें राष्ट्रसेवा, अनुशासन, संगठन
- और समाज के प्रति समर्पण की सीख मिली। उन्होंने कहा कि परिषद के प्रदेश
- अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए छात्रहित, शैक्षणिक उत्कृष्टता और
- राष्ट्रीय एकता के लिए काम करना उनके जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव रहा।
आधुनिक ज्ञान के साथ भारतीय जीवन मूल्यों से जुड़ने का आह्वान
उन्होंने कहा कि आज का विद्यार्थी आधुनिक तकनीक और वैश्विक ज्ञान से जुड़ा है, लेकिन उसे अपनी संस्कृति, भाषा, परंपरा और भारतीय जीवन मूल्यों से भी समान रूप से जुड़ा रहना होगा। यही संतुलन भारत को विश्व में विशिष्ट पहचान दिलाता है।
अनुशासन का दिया संदेश
कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष निर्धारित समय पर पहुंचे और तय 21 मिनट में अपना संबोधन पूरा किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह वे विधानसभा में सदस्यों से समय का पालन करवाते हैं, उसी तरह स्वयं भी समय की पाबंदी का पालन करते हैं। उन्होंने युवाओं से भी अनुशासन को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने की अपील की।
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Edited by – Krishika Agarwal


