Gaonmanch

राजस्थान न्यायिक प्रणाली सुधार: 2030 तक हर जिले में साइबर थाना

गावं मंच डेस्क जयपुर, 9 मई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि राज्य सरकार हर व्यक्ति तक सुलभ, त्वरित और पारदर्शी न्याय पहुँचाने के संकल्प के साथ काम कर रही है। शनिवार को जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में लोक अभियोजकों के लिए आयोजित कार्यशाला में उन्होंने राजस्थान न्यायिक प्रणाली सुधार की दिशा में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि लोक अभियोजक न्याय व्यवस्था की अहम कड़ी हैं और उन्हें बदलते कानूनों के अनुरूप खुद को अपडेट रखना होगा।

राजस्थान न्यायिक प्रणाली सुधार लोक अभियोजक कार्यशाला मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जयपुर

2030 तक साइबर सुरक्षा का मजबूत नेटवर्क

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों की साइबर सुरक्षा पर जोर देते हुए बताया कि राजस्थान न्यायिक प्रणाली सुधार के तहत वर्ष 2030 तक प्रदेश के सभी जिलों में साइबर पुलिस स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही:

  • साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर की स्थापना की जाएगी।
  • साइबर हेल्पलाइन कॉल सेंटर और अपराधों के एआई (AI) आधारित विश्लेषण की व्यवस्था होगी।
  • अब तक 10 हजार जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से 12 लाख लोगों को जागरूक किया जा चुका है।

औपनिवेशिक सोच से मुक्त होगी न्याय प्रणाली

भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाए गए तीन नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय प्रणाली को गुलामी की सोच से मुक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल हैं। इन कानूनों का केंद्र ‘दंड’ नहीं बल्कि ‘न्याय’ और आम नागरिक है। सरकार ने इन कानूनों के सफल क्रियान्वयन के लिए पुलिस और अभियोजन पक्ष के प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू कर दिए हैं।

प्रदेश में अदालतों का विस्तार

राजस्थान न्यायिक प्रणाली सुधार को गति देने के लिए राज्य सरकार ने 42 नए न्यायालय स्थापित किए हैं:

  • फलौदी, डीडवाना-कुचामन, खैरथल-तिजारा और ब्यावर सहित कई नए जिलों में जिला एवं सेशन न्यायालय खोले गए हैं।
  • भ्रष्टाचार निवारण और पॉक्सो एक्ट के तहत विशिष्ट न्यायालयों की संख्या बढ़ाई गई है।
  • सरकार ने अब तक 27 हजार से अधिक लोगों को विधिक सहायता उपलब्ध कराई है।
राजस्थान न्यायिक प्रणाली सुधार लोक अभियोजक कार्यशाला मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जयपुर

दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशीलता

मुख्यमंत्री ने लोक अभियोजकों से आह्वान किया कि वे दिव्यांगजनों से जुड़े मामलों में अधिक संवेदनशील बनें। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन दिव्यता का प्रतीक हैं और उनके लिए बाधा-मुक्त वातावरण निर्माण करना सरकार की प्राथमिकता है। कार्यशाला में विधि मंत्री जोगाराम पटेल, महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद और मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

राजस्थान में पंचायतों, ग्राम सभाओं और ग्रामीण योजनाओं से जुड़ी ताज़ा खबरें गाँव मंच के पंचायत सेक्शन में भी उपलब्ध हैं।

नोट:- यह विचार लेखक पत्रकार अंकित तिवारी Ankit Tiwari के है।

Scroll to Top