गांव मंच डेस्क, अहमदाबाद। भारत दुनिया का सबसे बड़ा कृषि आयातक देशों में से एक है, जहां घरेलू मांग और उत्पादन की कमी के कारण कई आवश्यक वस्तुओं का आयात किया जाता है। वित्त वर्ष 2024-25 में कृषि आयात का मूल्य अरबों डॉलर में रहा, जिसमें खाद्य तेलों का हिस्सा सबसे बड़ा है, लगभग 60 प्रतिशत से अधिक। दालें, फल और नट्स भी प्रमुख आयात हैं। ये आयात न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, बल्कि उपभोक्ताओं को विविधता और गुणवत्ता प्रदान करते हैं, हालांकि आयात बिल पर दबाव डालते हैं।

भारत में सबसे बड़ा आयात खाद्य तेल का
प्रमुख आयात वस्तुएं और सबसे बड़ा आयात देश खाद्य तेल का है। भारत अपनी जरूरत का 57-60 प्रतिशत तेल आयात करता है, मुख्य रूप से पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल और सनफ्लावर ऑयल। 2025 में नवंबर तक पाम ऑयल आयात में उतार-चढ़ाव रहा, लेकिन कुल मात्रा लाखों टन में है। इंडोनेशिया और मलेशिया से 90 प्रतिशत से अधिक पाम ऑयल आता है, जबकि सोयाबीन ऑयल अर्जेंटीना और ब्राजील से। ये तेल सस्ते और बड़े पैमाने पर उपलब्ध होने से पसंद किए जाते हैं।
इंडिया में आयातित दालों का बड़ा बाजार
भारत खाद्य क्षेत्र में अन्य देशों से दालों का दूसरा बड़ा आयात है। 2024-25 में दालों का आयात रिकॉर्ड 6.5-7 मिलियन टन तक पहुंचा, जो पिछले साल से दोगुना है। चना, मसूर, तुअर और उड़द मुख्य हैं। कनाडा (पीज और लेंटिल), ऑस्ट्रेलिया (चना), म्यांमार और रूस प्रमुख सप्लायर हैं। ये आयात घरेलू उत्पादन की कमी पूरी करते हैं और कीमतें स्थिर रखते हैं। फल और नट्स में सेब, बादाम, अखरोट और रॉ काजू प्रमुख हैं। फ्रेश फ्रूट आयात 3 अरब डॉलर से अधिक का हुआ, जिसमें अमेरिका से सेब और बादाम, अफ्रीकी देशों (आइवरी कोस्ट, तंजानिया) से रॉ काजू। भारत रॉ काजू आयात कर प्रोसेसिंग करता है और फिर निर्यात भी। आयातित फल प्रीमियम गुणवत्ता और वैरायटी के लिए मांग में हैं।
गुणवत्ता, कीमत और वैश्विक मौजूदगी
आयातित वस्तुओं की गुणवत्ता अक्सर बेहतर मानी जाती है, जैसे विदेशी सेब की चमक और स्वाद, या कनाडाई दालों की एकरूपता। कीमतें प्रतिस्पर्धी हैं, खासकर पाम ऑयल जो घरेलू तेलों से सस्ता पड़ता है। कुल आयात बिल खाद्य तेलों से ही अरबों डॉलर का होता है, जो व्यापार घाटे में योगदान देता है।नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशाआयात कम करने के लिए सरकार की नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स – ऑयल पाम (NMEO-OP) बड़ी पहल है। 2025-26 तक 6.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम लगाने और क्रूड पाम ऑयल उत्पादन 28 लाख टन तक बढ़ाने का लक्ष्य है। कंपनियां जैसे अदानी विल्मर और गोधरेज एग्रोवेट रिफाइनिंग और घरेलू उत्पादन बढ़ाने में सक्रिय हैं। ये प्रयास आयात निर्भरता कम कर किसानों की आय बढ़ा रहे हैं।आयात जरूरी हैं, लेकिन घरेलू उत्पादन और नवाचार से भारत आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। यह संतुलन खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।


