गांव मंच डेस्क, मुंबई। भारत दुनिया का एक प्रमुख कृषि निर्यातक देश बन चुका है, जहां विविध जलवायु और मेहनती किसानों की बदौलत उत्पादित फसलें, फल, सब्जियां और मसाले वैश्विक थाली में अपनी खास जगह बना रहे हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात 50 अरब डॉलर के पार पहुंच गया, जबकि अप्रैल-सितंबर 2025 में ही 25.9 अरब डॉलर का निर्यात हुआ, जो पिछले साल से 8.8 प्रतिशत अधिक है। यह निर्यात न केवल किसानों की आय बढ़ा रहा है, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा में भारत की भूमिका को मजबूत कर रहा है।

प्रमुख निर्यात उत्पाद: फसलें, फल और सब्जियां
भारत से निर्यात होने वाली प्रमुख कृषि वस्तुओं में चावल सबसे आगे है। बासमती चावल अपनी सुगंध और गुणवत्ता के लिए विश्व प्रसिद्ध है, जबकि गैर-बासमती चावल बड़े पैमाने पर निर्यात होता है। सालाना चावल निर्यात 20 मिलियन टन से अधिक रहता है। मसाले भारत की पहचान हैं – मिर्च, हल्दी, जीरा, धनिया और गरम मसाला जैसे उत्पादों का निर्यात 4 अरब डॉलर से ज्यादा का होता है।फलों में अंगूर सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद है, उसके बाद अल्फांसो आम, अनार, केला और संतरा आते हैं। ताजी सब्जियों में प्याज प्रमुख है, जबकि प्रसंस्कृत सब्जियां और फल भी अच्छी मांग रखते हैं। अन्य प्रमुख निर्यातों में समुद्री उत्पाद (झींगा), चीनी, मांस और दालें शामिल हैं। ये उत्पाद मध्य पूर्व, अमेरिका, यूरोप, दक्षिण पूर्व एशिया और अफ्रीकी देशों में पहुंच रहे हैं।
वैश्विक मौजूदगी और गुणवत्ता का जादू
भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक मांग उनकी प्राकृतिक गुणवत्ता, जैव विविधता और प्रतिस्पर्धी कीमतों के कारण है। बासमती चावल और कई मसालों को जीआई टैग मिला हुआ है, जो उनकी शुद्धता की गारंटी देता है। ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग बढ़ रही है, खासकर यूरोप और अमेरिका में। निर्यात मूल्य के लिहाज से चावल और मसाले सबसे ज्यादा कमाई देते हैं, जबकि फलों का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है। अंगूर और अनार जैसे फल प्रीमियम कीमत पर बिक रहे हैं। कुल निर्यात में प्रसंस्कृत उत्पादों का हिस्सा भी बढ़कर 10 अरब डॉलर के करीब पहुंच गया है।
तकनीक और प्रयोग बना रहे नए अवसर
भारतीय कृषि निर्यात में नवाचार की बड़ी भूमिका है। ड्रोन तकनीक, एआई आधारित फार्मिंग, प्रिसिजन एग्रीकल्चर और बायोटेक सीड्स जैसी तकनीकें उत्पादन बढ़ा रही हैं। कई कंपनियां इस क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं – जैसे ईस्ट-वेस्ट सीड और यूपीएल जैसी कंपनियां बेहतर बीज और सस्टेनेबल फार्मिंग सॉल्यूशंस प्रदान कर रही हैं। फार्मोनॉट जैसी एग्री-टेक कंपनियां सैटेलाइट और डेटा एनालिटिक्स से किसानों को मदद दे रही हैं, जिससे निर्यात योग्य गुणवत्ता वाली फसलें बढ़ रही हैं।यह निर्यात न केवल अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय कृषि की मिठास और सुगंध फैला रहा है। आने वाले वर्षों में और अधिक नवाचार से भारत का कृषि निर्यात नई ऊंचाइयां छूएगा।


