376.5 मिलियन टन से अधिक खाद्यान्न उत्पादन, लेकिन बढ़ती लागत और मानसून की चिंता अब भी बरक
तनु रूंगटा, गांव मंच। मुंबई। भारत ने वर्ष 2026 में कृषि क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। केंद्र सरकार के अनुसार देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.5 मिलियन टन से अधिक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।
प्रमुख फसल उत्पादन
- चावल: लगभग 154 मिलियन टन
- गेहूं: लगभग 120.6 मिलियन टन
- मक्का: लगभग 55 मिलियन टन
यह उपलब्धि देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
- टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल खेती पर जोर
बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए सरकार कृषि क्षेत्र में कई सुधार लागू कर रही है।
सरकार की प्रमुख प्राथमिकताएं
- प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना
- बेहतर जल प्रबंधन प्रणाली विकसित करना
- दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाना
- डिजिटल तकनीकों और स्मार्ट कृषि उपकरणों का उपयोग बढ़ाना
- किसानों को मौसम आधारित सलाह और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना
इन पहलों का उद्देश्य खेती को अधिक टिकाऊ, लाभदायक और भविष्य के लिए सुरक्षित बनाना है।
उर्वरकों की बढ़ती कीमत बनी चिंता
वैश्विक संघर्षों और सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण उर्वरकों की कीमतों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।
प्रमुख चुनौतियां:
- आयातित उर्वरकों पर निर्भरता
- बढ़ती उत्पादन लागत
- किसानों के लिए महंगे कृषि इनपुट
सरकार के प्रयास
- घरेलू उर्वरक उत्पादन बढ़ाना
- कोयला आधारित यूरिया उत्पादन नीति को बढ़ावा देना
- आयात लागत कम करने के लिए वैकल्पिक उपाय लागू करना
- बीजों की कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई
कर्नाटक समेत कई राज्यों से किसानों द्वारा बीजों की बढ़ती कीमतों और कालाबाजारी की शिकायतें सामने आई हैं।
सरकार द्वारा उठाए गए कदम
- बीज विक्रेताओं की निगरानी बढ़ाई गई
- कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई
- किसानों को निर्धारित कीमत पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के निर्देश
सरकार का लक्ष्य है कि किसानों को समय पर और उचित कीमत पर अच्छी गुणवत्ता के बीज मिल सकें।
- किसानों के सामने अभी भी बड़ी चुनौतियां
रिकॉर्ड उत्पादन और नई नीतियों के बावजूद कृषि क्षेत्र को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
मुख्य चुनौतियां
- अनिश्चित मानसून
- जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
- खेती की बढ़ती लागत
- आयातित उर्वरकों पर निर्भरता
- छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति
6. आगे की राह
आने वाला खरीफ सीजन भारत की कृषि व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
यदि सरकार की नई नीतियां, तकनीकी सुधार और किसानों को दी जाने वाली सहायता प्रभावी साबित होती हैं, तो भारत न केवल खाद्यान्न उत्पादन में बल्कि किसानों की आय और कृषि विकास के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
भारत की कृषि आज एक मजबूत मोड़ पर खड़ी है। रिकॉर्ड उत्पादन उम्मीद जगाता है, लेकिन असली सफलता तब होगी जब यह उपलब्धि किसानों की समृद्धि और दीर्घकालिक कृषि विकास में बदल सके।
भारत की कृषि ने रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन के साथ एक नई उपलब्धि हासिल की है, जो देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि क्षमता को दर्शाती है। सरकार प्राकृतिक खेती, डिजिटल तकनीक और जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देकर इस सफलता को और मजबूत बनाने का प्रयास कर रही है। हालांकि, बढ़ती लागत, उर्वरकों पर आयात निर्भरता, बीजों की कालाबाजारी और मानसून की अनिश्चितता जैसी चुनौतियां अभी भी किसानों के सामने मौजूद हैं। आने वाला खरीफ सीजन यह तय करेगा कि भारत अपनी इस कृषि सफलता को किसानों की समृद्धि और दीर्घकालिक कृषि विकास में कितनी प्रभावी रूप से बदल पाता है।



