गांव मंच / डेस्क, राजस्थान
राजस्थान की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने जा रही है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में आयोजित स्टेट एम्पावर्ड कमेटी की अहम बैठक में राज्य के लिए करीब 50 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को कस्टमाइज्ड पैकेज के तहत अनुशंसा दी गई है। इन परियोजनाओं के ज़मीन पर उतरते ही प्रदेश में 13 हजार से अधिक युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
उद्योगों का बदलेगा नक्शा
ऊर्जा, ऑटोमोबाइल, सीमेंट, स्टील और हेल्थ सेक्टर जैसे अहम क्षेत्रों में आने वाले ये निवेश प्रस्ताव राजस्थान के औद्योगिक परिदृश्य को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखते हैं। देश के बड़े औद्योगिक समूहों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि राजस्थान अब निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
निवेशकों का बढ़ा भरोसा
बैठक में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल ने बताया कि राज्य सरकार की निवेश-अनुकूल नीतियां, आसान प्रक्रियाएं और तेज़ निर्णय प्रणाली निवेशकों का भरोसा मजबूत कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में राजस्थान आज देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है, जिसके चलते देश-विदेश की बड़ी कंपनियां यहां निवेश के लिए आगे आ रही हैं।
एक साल में 20 से ज्यादा नई नीतियां
पिछले एक वर्ष में राज्य सरकार ने निवेश इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए 20 से अधिक नई नीतियां लागू की हैं। सिंगल विंडो सिस्टम राजनिवेश पोर्टल GIS आधारित औद्योगिक भूमि बैंक ई-ऑक्शन व्यवस्था इन पहलों ने उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया को पहले से कहीं ज्यादा सरल और पारदर्शी बना दिया
RIPS के तहत 1500 करोड़ से ज्यादा इंसेंटिव
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल ने बताया कि राजस्थान इन्वेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम (RIPS) के तहत चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 1500 करोड़ रुपये से अधिक के इंसेंटिव दिए जा चुके हैं। यह दर्शाता है कि सरकार केवल निवेश आमंत्रित ही नहीं कर रही, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इन कंपनियों ने दिखाया भरोसा
कस्टमाइज्ड पैकेज के लिए आवेदन करने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल हैं जिंदल रिन्यूएबल पावर,स्टार सीमेंट,डालमिया भारत,जेएसडब्ल्यू सीमेंट,हिंदुस्तान जिंक,चंबल फर्टिलाइजर,संगम इंडिया,होंडा मोटरसाइकिल इन सभी प्रस्तावों को अब मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले निवेश बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा।
उच्चस्तरीय अधिकारियों की मौजूदगी
बैठक में जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार, वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनन्द कुमार, पीडब्ल्यूडी के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता, ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अजिताभ शर्मा, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव वैभव गालरिया, खान एवं पेट्रोलियम विभाग के प्रमुख सचिव टी. रविकान्त, नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. देबाशीष पृष्टी, उद्योग आयुक्त सुरेश कुमार ओला और निवेश संवर्धन ब्यूरो के अतिरिक्त आयुक्त जुगल किशोर मीणा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


