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राजस्थान शहरी विकास मॉडल: मंत्री झाबर सिंह खर्रा की डेनमार्क यात्रा

गावं मंच डेस्क, जयपुर 8 मई । मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश को विकसित बनाने की दिशा में राजस्थान शहरी विकास मॉडल को अब वैश्विक तकनीक से जोड़ा जा रहा है। इसी क्रम में नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा की डेनमार्क यात्रा राज्य के शहरी नियोजन के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रही है। इस यात्रा के दौरान कोपेनहेगन से लेकर आरहस (Aarhus) तक आधुनिक शहरी प्रबंधन पर विस्तृत मंथन किया गया।

जल संरक्षण और स्मार्ट मैनेजमेंट पर जोर

डेनमार्क में आयोजित उच्चस्तरीय बैठकों में राजस्थान शहरी विकास मॉडल के तहत जल संरक्षण, जलवायु अनुकूल अवसंरचना और अपशिष्ट जल प्रबंधन जैसे विषयों पर विशेष चर्चा हुई। मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने डेनमार्क के पर्यावरण मंत्रालय में उन प्रणालियों का अध्ययन किया, जिन्होंने डेनमार्क को सतत शहरी विकास में विश्व का अग्रणी देश बनाया है।

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ई-गवर्नेंस और आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम

यात्रा के दौरान आरहस म्युनिसिपलिटी ऑफिस का दौरा बेहद महत्वपूर्ण रहा। वहां ई-गवर्नेंस और नवाचार आधारित विकास को बारीकी से समझा गया। राजस्थान के शहरों में बाढ़ प्रबंधन और वर्षा जल संचयन के लिए डेनमार्क की स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज संरचनाओं को राजस्थान शहरी विकास मॉडल में शामिल करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।

पर्यावरण संतुलन और तकनीकी नवाचार

“State of Green” अध्ययन दौरे के दौरान जलवायु अनुकूलन तकनीकों और प्रभावी जल आपूर्ति प्रणालियों का गहन अध्ययन किया गया। झाबर सिंह खर्रा ने बताया कि तकनीक और पर्यावरण संतुलन के समन्वय से ही सुरक्षित शहरों का निर्माण संभव है। प्रदेश की डबल इंजन सरकार अब स्वच्छता, जल सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं के उच्च मानक स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है।

प्रमुख अधिकारियों से विचार-विमर्श

इस यात्रा के दौरान डेनमार्क में भारत के राजदूत मनीष प्रभात और भारतीय जल शक्ति प्रतिनिधिमंडल के साथ भी तकनीकी संवाद हुआ। अंतर्राष्ट्रीय अनुभवों के माध्यम से राजस्थान शहरी विकास मॉडल को नई दिशा देने के लिए यह दौरा राजस्थान के भविष्य के शहरों के लिए दूरदर्शी पहल माना जा रहा है।

नोट:- यह विचार लेखक पत्रकार अंकित तिवारी Ankit Tiwari के है।

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