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प्राकृतिक खेती किसानों की समृद्धि का मार्ग: मलाव गांव में अनोखा अनुभव

गावं मंच मलाव (पंचमहाल), 21 मई । गुजरात के पंचमहाल जिले के मलाव गांव में आज का अनुभव बेहद अद्भुत और भारतीय संस्कृति की जड़ों से जोड़ने वाला रहा। यहाँ के प्रगतिशील किसान श्री नरेशभाई पटेल के प्राकृतिक फार्म (Natural Farm) का दौरा कर न केवल आधुनिक और स्वदेशी खेती की बारीकियों को समझने का मौका मिला, बल्कि ग्रामीण जीवन की वास्तविक आत्मा को भी करीब से महसूस किया गया।

प्राकृतिक खेती किसानों की समृद्धि का मार्ग पंचमहाल के मलाव गांव में हल चलाते हुए

खेत में चलाया हल, खुद दुहा गाय का दूध

इस जमीनी दौरे के दौरान किसान के साथ पूरी तरह पारंपरिक अंदाज में समय बिताया गया, जिसके प्रमुख मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे:

  • दुग्ध सहकारिता का अनुभव: फार्म पर स्वयं अपने हाथों से गाय का दूध दुहा और फिर उस शुद्ध दूध को साइकिल पर लादकर मलाव सहकारी दुग्ध मंडली में जमा कराने का एक अनोखा अनुभव प्राप्त किया, जो बेहद आत्मिक संतुष्टि देने वाला क्षण था।
  • हल्दी का रोपण: नरेशभाई के खेत में बैलों के साथ हल चलाया और पारंपरिक विधि से हल्दी की फसल का रोपण भी किया।

नरेशभाई के खेत पर लहलहाती शुद्ध और प्राकृतिक फसलें इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि प्राकृतिक खेती ही किसानों की समृद्धि का मार्ग है।

मलाव सहकारी दुग्ध मण्डली में गाय का दूध जमा कराते हुए पारंपरिक अनुभव

विदेशी मुद्रा की बचत और मिट्टी का संरक्षण

इस अनुभव के बाद यह बात स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आती है कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों से मुक्त खेती आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है:

  1. मृदा स्वास्थ्य: रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती हमारी उपजाऊ मिट्टी को बंजर होने से बचाती है और उसकी जैविक क्षमता को बनाए रखती है।
  2. आर्थिक आत्मनिर्भरता: महंगे रासायनिक उर्वरकों के आयात पर निर्भरता कम होने से देश की मूल्यवान विदेशी मुद्रा बाहर जाने से रुकती है।

“अगर हमें आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ रखना है और पर्यावरण को बचाना है, तो रासायनिक उर्वरकों का पूरी तरह त्याग कर स्वदेशी और प्राकृतिक कृषि को अपनाना ही होगा। जब हमारा अन्नदाता किसान समृद्ध होगा, तभी यह देश पूरी तरह समृद्ध और आत्मनिर्भर बनेगा।”

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नोट:- यह विचार लेखक पत्रकार अंकित तिवारी Ankit Tiwari के है।

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