गावं मंच गंगापुर (भीलवाड़ा), 21 मई । भीलवाड़ा जिले के सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र की ढोसर ग्राम पंचायत अंतर्गत साकरिया गांव में प्रकृति का एक बेहद अद्भुत और दुर्लभ दृश्य ग्रामीणों के आकर्षण का केंद्र बन गया। द्वितीय ज्येष्ठ मास की भीषण तपिश और झुलसाती गर्म हवाओं के बीच यहाँ दो विशाल धामण सांपों का जोड़ा लंबे समय तक प्रणय मुद्रा में अठखेलियां करता नजर आया। ग्रामीण अंचल में इस दृश्य को कौतूहल से देखा गया और लोगों ने इसे क्षेत्र में अच्छी बारिश तथा समृद्ध फसल के शुभ संकेत से जोड़ा।
खेत के रास्ते पर आधे घंटे तक चली अठखेलियां
जानकारी के अनुसार, साकरिया गांव के निवासी किसान सांवरमल जोशी अलसुबह भूणास से मेघरास रोड स्थित अपने खेत पर गए हुए थे। सुबह करीब 7:30 बजे जब वे वापस लौट रहे थे, तब पथवारी वाले कुएं के पास अचानक सड़क के बीचोंबीच उन्हें धामण सांपों की प्रणय लीला दिखाई दी।

- कैमरे में कैद हुआ पल: दोनों विशाल सांप करीब आधे घंटे तक एक-दूसरे से लिपटे रहे। किसान सांवरमल ने तुरंत इस दुर्लभ प्राकृतिक क्षण को अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया।
- ग्रामीणों का जमावड़ा: खबर फैलते ही आसपास के कई ग्रामीण और किसान भी मौके पर पहुंच गए। गांव के बुजुर्गों ने अपनी पुरानी लोक मान्यताओं का हवाला देते हुए कहा कि इस मौसम में धामण सांपों के जोड़े का इस प्रकार दिखना भरपूर वर्षा और आगामी बेहतर कृषि सीजन का पूर्वाभास देता है।
क्यों कहलाते हैं धामण सांप ‘किसान के मित्र’?
ग्रामीण अंचलों में धामण सांपों (Ratsnakes) को पर्यावरण और कृषि चक्र के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- गैर-जहरीले (Non-Venomous): धामण प्रजाति के सांप जहरीले नहीं होते हैं, इसलिए इनसे इंसानों को कोई सीधा खतरा नहीं होता।
- प्राकृतिक कीट नियंत्रक: ये खेतों में फसलों को भारी नुकसान पहुंचाने वाले चूहों, छिपकलियों और अन्य छोटे जीवों को खाकर नष्ट करते हैं। यही वजह है कि इन्हें ग्रामीण समाज में “किसान का मित्र” कहा जाता है।
भारतीय लोक संस्कृति में नागों का महत्व
भारतीय सनातन परंपरा और धार्मिक मान्यताओं में भी सांपों को विशेष स्थान दिया गया है। हिंदू धर्म में नागों को उर्वरता, पुनर्जन्म और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। भगवान शिव के गले का हार होना और भगवान विष्णु का शेषनाग की शैया पर शयन करना, भारतीय आस्था में जीवों के प्रति सम्मान को दर्शाता है। भीषण गर्मी और उमस के बीच साकरिया गांव में दिखे इस नजारे ने क्षेत्र के किसानों में इस बार बेहतर मानसून और शानदार पैदावार की नई उम्मीद जगा दी है।
- राजस्थान की भौगोलिक और कृषि संबंधी प्राथमिकताओं तथा मौसम के पूर्वानुमानों की आधिकारिक जानकारी के लिए कृषि विभाग, राजस्थान सरकार के पोर्टल पर विजिट करें।
- भारतीय वन्यजीवों, सांपों की विभिन्न प्रजातियों और उनके संरक्षण से जुड़े तथ्यों को जानने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
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नोट:- यह विचार लेखक पत्रकार अंकित तिवारी Ankit Tiwari के है।


