गांव मंच डेस्क, नई दिल्ली।
देशभर में खरीफ सीजन की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। किसान खेतों की जुताई, बीजों की खरीद और खाद के इंतजाम में जुटे हैं। लेकिन इस बार खेती की तैयारियों के साथ एक बड़ी चिंता भी जुड़ी हुई है। मौसम विशेषज्ञों ने कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई है।
ऐसे में किसानों के मन में सवाल उठ रहा है कि अगर मानसून कमजोर रहा तो फसलों और आय पर क्या असर पड़ेगा। इसी चिंता को देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ सीजन और मानसून तैयारियों की समीक्षा की है।
बैठक में राज्यों की तैयारियों, बीज और उर्वरकों की उपलब्धता, जल संसाधनों की स्थिति और किसानों के लिए राहत उपायों पर चर्चा हुई।
किसानों के लिए सरकार के 3 बड़े फोकस
- बीज और खाद की कमी नहीं होने देने की तैयारी
खरीफ सीजन में समय पर बुवाई सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसे ध्यान में रखते हुए कृषि मंत्रालय ने बीज और उर्वरकों के भंडार की समीक्षा की है।
राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि किसानों तक जरूरी संसाधन समय पर पहुंचें। सरकार नहीं चाहती कि किसी भी किसान की बुवाई केवल संसाधनों की कमी के कारण प्रभावित हो।
कम बारिश की स्थिति के लिए वैकल्पिक योजना
हर जिले के लिए विशेष कंटिजेंसी प्लान तैयार किए गए हैं।
अगर किसी क्षेत्र में सामान्य से कम बारिश होती है, तो किसानों को वैकल्पिक फसलों और खेती के तरीकों की सलाह दी जाएगी। इससे नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
फसल बीमा और ऋण व्यवस्था को मजबूत करना
मौसम से जुड़े जोखिमों को देखते हुए सरकार ने फसल बीमा और कृषि ऋण व्यवस्था पर भी जोर दिया है।
प्राकृतिक आपदा या उत्पादन में कमी की स्थिति में यही व्यवस्थाएं किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सकती हैं।
आखिर मानसून को लेकर चिंता क्यों है?
भारत की लगभग आधी खेती आज भी बारिश पर निर्भर करती है।
धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और कई दलहनी फसलें समय पर होने वाली बारिश पर आधारित हैं। यदि मानसून कमजोर रहता है, तो बुवाई में देरी हो सकती है। इससे उत्पादन और किसानों की कमाई दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम के कारण खेती में जोखिम पहले की तुलना में बढ़ा है। इसलिए समय रहते तैयारी करना बेहद जरूरी है।
किसान अभी से क्या कदम उठा सकते हैं?
बदलते मौसम को देखते हुए किसान कुछ जरूरी तैयारियां कर सकते हैं।
- प्रमाणित बीजों की व्यवस्था पहले से करें।
- खेत में नमी संरक्षण के उपाय अपनाएं।
- वर्षा जल संचयन पर ध्यान दें।
- फसल बीमा की स्थिति जांच लें।
- स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें।
- कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विभाग की सलाह लेते रहें। खेती में अब तैयारी ही सबसे बड़ा हथियार
खेती में अब तैयारी ही सबसे बड़ा हथियार
मौसम पर किसी का नियंत्रण नहीं है, लेकिन तैयारी पर जरूर है।
पिछले कुछ वर्षों में किसानों ने सूखा, बेमौसम बारिश और अत्यधिक वर्षा जैसी चुनौतियों का सामना किया है। ऐसे समय में वैज्ञानिक खेती और समय पर योजना ही नुकसान को कम कर सकती है।
सरकार ने अपनी तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है। अब किसानों के लिए भी जरूरी है कि वे खरीफ सीजन की हर संभावना को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति बनाएं। अच्छी खेती केवल अच्छी बारिश से नहीं, बल्कि अच्छी तैयारी से भी होती है।
लेखक:- एंजेल कटारिया


