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जल क्रांति की ओर राजस्थान, सेवंत्री गांव में वंदे गंगा जल अभियान में जोधपुर राजपरिवार के राजकुमार कार्तिकेय सिंह राठौड़ ने किया भगीरथ श्रमदान

रणबांका ट्रस्ट और ग्रामीणों के अटूट संकल्प से संवरी कबीर बावड़ी। जोधपुर राजपरिवार के सदस्य राजकुमार कार्तिकेय सिंह राठौड़ ने जगाई जल चेतना की अलख, कहा- “पानी सहेजना हमारी सदियों पुरानी संस्कृति।”

गांव मंच, राजसमंद। राजस्थान की सूखी धरती पर जल संरक्षण को एक सशक्त जन-आंदोलन बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक शुरुआत हुई है। “वंदे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान” के तहत राजसमंद की ग्राम पंचायत सेवंत्री में एक भव्य और प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। रणबांका ट्रस्ट और ग्रामीण जनशक्ति के इस अनूठे भगीरथ प्रयास ने गांव में पर्यावरण और जल संवर्धन का एक नया अध्याय लिख दिया है।

शाही सरोकार और माटी से जुड़ाव

इस महा-अभियान में मुख्य अतिथि के रूप में जोधपुर राजपरिवार के सदस्य और रणबांका ट्रस्ट के निदेशक राजकुमार कार्तिकेय सिंह राठौड़ (अजीत भवन, जोधपुर) उपस्थित रहे। राजपरिवारों की लोक-कल्याण की गौरवशाली परंपरा को जीवंत करते हुए, राजकुमार ने स्वयं आगे बढ़कर कबीर बावड़ी एनीकट की साफ-सफाई के लिए श्रमदान किया। राजपरिवार के इस जमीनी जुड़ाव और समर्पण को देखकर युवाओं और ग्रामीणों का उत्साह दोगुना हो गया।

गांव के मंच से गूंजे जनचेतना के सुर

ऐतिहासिक बावड़ी का जीर्णोद्धार: ग्रामीणों और ट्रस्ट के सदस्यों ने मिलकर कबीर बावड़ी एनीकट की कायापलट की और स्वच्छता का संदेश दिया।

हरियाली और परिंडे: मरुधरा को हरा-भरा बनाने के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया और तपती गर्मी में बेजुबान पक्षियों के लिए जगह-जगह परिंडे बांधे गए।

नारी शक्ति का वंदन: ग्रामीण अंचल में उल्लेखनीय और प्रेरक कार्य करने वाली महिलाओं को मंच से सम्मानित कर उनके हौसले को नई उड़ान दी गई।

सामूहिक महा-शपथ: गांव के हर नागरिक ने पानी की एक-एक बूंद को सहेजने के लिए ‘वंदे गंगा जल संरक्षण शपथ’ ली।

“मेह रो रुतु आवे एक बार, पाणी राखो संभाल।”

राजकुमार कार्तिकेय सिंह राठौड़ ने इस सुप्रसिद्ध राजस्थानी लोक-कहावत के जरिए ग्रामीणों के दिलों को छुआ। उन्होंने कहा कि वर्षा का जल सीमित है, इसलिए पारंपरिक जल स्रोतों जैसे कुएं, बावड़ी और तालाबों को पुनर्जीवित करना आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा सबसे बड़ा नैतिक दायित्व है।

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