1 जून से 30 अक्टूबर तक विदेशी कपास पर नहीं लगेगा शुल्क; घरेलू दाम में नरमी, MSP बढ़ने से रकबा बढ़ने की उम्मीद
नोएडा
केंद्र सरकार ने कपड़ा मिलों को राहत देते हुए 1 जून से 30 अक्टूबर 2026 तक विदेश से आने वाली कपास पर आयात शुल्क हटा दिया है। इस फैसले के बाद देश के कपास बाजार में हलचल तेज हो गई है।
सरकार ने टैक्स हटाया |
पिछले कुछ महीनों में विदेशी बाजार में कपास 47% तक महंगी हो गई थी। फरवरी से मई के बीच दाम 88 सेंट प्रति पाउंड तक पहुंच गए थे। इससे देश की सूत और कपड़ा मिलों का खर्च बढ़ गया था। अब बिना टैक्स के विदेश से कपास आने से मिलें सस्ता माल खरीदकर अच्छा सूत बना सकेंगी और विदेशों में सस्ता बेच पाएंगी।
किसानों पर पड़ेगा असर |
विदेशी कपास सस्ती होने से देशी कपास के दाम पर दबाव बढ़ गया है। इसी वजह से भारतीय कपास निगम यानी CCI ने अपनी कपास 700 रुपये प्रति कैंडी सस्ती कर दी है। फिर भी सोमवार को बाजार में सिर्फ 700 गांठ कपास बिकी।
एक्सपर्ट रामानुज दास बूब कहते हैं कि अब खरीदारों के पास कई रास्ते हैं। वो चाहें तो विदेश से कपास लाएं या देश के व्यापारियों और CCI से खरीदें। इसी वजह से घरेलू कपास का रेट नहीं बढ़ रहा।
अब कपास का रकबा घटेगा |
नहीं। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया का मानना है कि आने वाले खरीफ सीजन में किसान ज्यादा कपास बोएंगे। इसकी दो बड़ी वजह हैं
- MSP में बढ़ोतरी | सरकार ने 2026-27 के लिए मीडियम कपास का MSP 557 रुपये बढ़ाकर 8,267 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। लंबी रेशा वाली कपास का MSP 8,667 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है।
- अच्छे दाम की उम्मीद | पिछले साल किसानों को कपास के अच्छे दाम मिले थे, इसलिए वो इस बार भी रकबा बढ़ाने के मूड में हैं। CAI का अनुमान है कि इस बार रकबा 7% तक बढ़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल |
फिलहाल विदेशी बाजार में थोड़ी नरमी है। सोमवार को ICE पर कपास 1.68% महंगी होकर 77.44 सेंट प्रति पाउंड पर पहुंच गई। जबकि मई में ये 88 सेंट तक थी।
सूत मिलों को होगा फायदा |
कॉटयार्न ट्रेडलिंक के आनंद पोपट बताते हैं कि अब मिलें दुनिया के किसी भी देश से कम अशुद्धियों वाली अच्छी क्वालिटी की कपास मंगा सकेंगी। इससे बढ़िया क्वालिटी का सूत, कपड़ा और गारमेंट बनेंगे। निर्यात बढ़ेगा और देश को डॉलर मिलेंगे।
किसान के लिए जरूरी बात |
- दाम पर दबाव | अगले 5 महीने विदेशी कपास सस्ती रहेगी, इसलिए मंडी में तेजी की उम्मीद कम है।
- MSP का सहारा | सरकार ने MSP बढ़ा दिया है, तो घबराएं नहीं। CCI खरीद करेगी।
- बुआई का फैसला | एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि लंबी अवधि में कपास की डिमांड बनी रहेगी। बुआई से पहले अपने जिले की मंडी और CCI का रेट जरूर चेक कर लें।


