गांव मंच, मेघालय 5 जून। मेघालय खासी किसान पारंपरिक खेती हिल्स में बदलाव जारी है। यहाँ पहले हाइब्रिड मिर्च की खेती बहुत लोकप्रिय थी। बाजार की मांग देखकर रासायनिक खाद का प्रयोग बढ़ा।
शुरू में किसानों को बड़ा मुनाफा हुआ। हालांकि, बाद में इसके गंभीर नुकसान सामने आए।
लगातार रसायनों के उपयोग से मिट्टी खराब हुई। भूमि की प्राकृतिक उपजाऊ क्षमता तेजी से घटी। आसपास के जल स्रोत भी सूखने लगे। इससे स्थानीय जैव विविधता को नुकसान पहुँचा।
खेतों से केंचुए और मित्र कीट गायब हुए। अब खासी किसान पारंपरिक खेती अपना रहे हैं मेघालय खासी किसान पारंपरिक खेती।

मुख्य बिंदु: रासायनिक बनाम पारंपरिक कृषि का सफर
- शुरुआती भ्रम: हाइब्रिड मिर्च और रसायनों से आय बढ़ी थी।
- जमीन को नुकसान: समय के साथ मिट्टी की क्षमता कम हुई।
- जीवों का संकट: रासायनिक खाद से मित्र जीव खत्म हुए।
- पारंपरिक वापसी: किसान अब फिर देसी बीज अपना रहे हैं।
- जलवायु अनुकूल: यह पुरानी पद्धति पर्यावरण के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
पारंपरिक ‘झूम खेती’ और फसल विविधता का महत्व
मेघालय खासी किसान पारंपरिक खेती खासी समुदाय सदियों से ‘झूम खेती’ करता है। यह प्रणाली पर्यावरण के बहुत अनुकूल है। इस पारंपरिक मॉडल की कई विशेषताएं हैं:
- मिश्रित खेती: इसमें मिर्च, मक्का और अरबी साथ उगाते हैं।
- मिट्टी की सुरक्षा: फसल विविधता से पोषक तत्व बने रहते हैं।
- खाद्य सुरक्षा: यह मॉडल भोजन की सुरक्षा पक्की करता है।

पिछले वर्षों में नकदी फसलों की होड़ बढ़ी। इस होड़ ने आत्मनिर्भर व्यवस्था को नुकसान पहुँचाया। इससे फसल विविधता बहुत कम हो गई। साथ ही पारंपरिक बीज भी लुप्त होने लगे।
भविष्य की कृषि का असली रास्ता
“खासी किसानों का अनुभव बड़ा सबक है। यह बदलाव केवल परंपरा बचाने का प्रयास नहीं है। यह खेती को टिकाऊ बनाने का वैज्ञानिक कदम है।” — कृषि विशेषज्ञ समीक्षा
अब खासी किसान जैविक खाद अपना रहे हैं। वे स्थानीय बीजों का संरक्षण कर रहे हैं।
मिट्टी और पानी बचाने से लागत कम हुई है। सुरक्षित भविष्य पारंपरिक ज्ञान में ही छिपा है।
- उत्तर-पूर्वी राज्यों में जैविक कृषि की योजनाओं को देखने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
- पहाड़ी क्षेत्रों में झूम खेती और मृदा संरक्षण तकनीकों की रिपोर्ट पढ़ने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) उत्तर-पूर्वी पहाड़ी क्षेत्र अनुसंधान परिसर के आधिकारिक वेब पोर्टल पर विजिट करें।
राजस्थान में पंचायतों, ग्राम सभाओं और ग्रामीण योजनाओं से जुड़ी ताज़ा खबरें गाँव मंच के किसान सेक्शन में भी उपलब्ध हैं।
नोट:- यह विचार लेखक पत्रकार तनु रंगटा Tanu Rungta के है।


