Gaonmanch

पश्चिम बंगाल में कम्युनिटी पेट्रोलिंग से घटा फसल नुकसान

गांवमंच डेस्क | कोलकाता | पश्चिम बंगाल के किसानों के सामने फसलों को बचाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। जंगली जानवरों और अन्य कारणों से हर साल किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। हालांकि, उत्तर बंगाल के कई गांवों में सामुदायिक गश्त (कम्युनिटी पेट्रोलिंग) ने इस समस्या का प्रभावी समाधान प्रस्तुत किया है। इसके विपरीत, दक्षिण बंगाल के किसान अभी भी ऐसी व्यवस्था के अभाव में नुकसान झेल रहे हैं।

क्या हुआ?

उत्तर बंगाल के कई ग्रामीण इलाकों में किसानों और स्थानीय निवासियों ने मिलकर फसलों की सुरक्षा के लिए सामुदायिक गश्त शुरू की है। इसके तहत गांव के लोग रात के समय समूह बनाकर खेतों की निगरानी करते हैं। इस पहल का उद्देश्य फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले खतरों से बचाना है।

कैसे हुआ?

सामुदायिक गश्त में गांव के लोग बारी-बारी से अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। खेतों के आसपास निगरानी रखने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर अन्य किसानों को तुरंत सूचना देने की व्यवस्था बनाई गई है। सामूहिक प्रयास के कारण फसल नुकसान की घटनाओं में कमी देखने को मिली है।

कहां हुआ?

यह मॉडल मुख्य रूप से उत्तर बंगाल के कई जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी साबित हुआ है। वहीं दक्षिण बंगाल के अनेक गांवों में अभी ऐसी व्यवस्था विकसित नहीं हो सकी है, जिसके कारण वहां के किसान अधिक जोखिम का सामना कर रहे हैं।

किसानों पर प्रभाव

किसानों का कहना है कि सामुदायिक गश्त के कारण उनकी फसलें पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हैं। इससे आर्थिक नुकसान कम हुआ है और खेती को लेकर उनका भरोसा भी बढ़ा है। दूसरी ओर, दक्षिण बंगाल के किसान अभी भी फसल सुरक्षा को लेकर चिंता में हैं।

उत्तर बंगाल का सामुदायिक गश्त मॉडल यह दिखाता है कि स्थानीय लोगों की भागीदारी से कृषि संबंधी समस्याओं का प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है। यदि इस मॉडल को दक्षिण बंगाल के अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जाए, तो फसल नुकसान को कम करने और किसानों की आय की सुरक्षा में मदद मिल सकती है।

लेखक | तनु रूंगटा

Scroll to Top