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इंदौर में BRICS देशों की कृषि बैठक दुनिया की कृषि चुनौतियों पर चर्चा

गांव मंच डेस्क | इंदौर | कभी सूखा, कभी बेमौसम बारिश और कभी बढ़ती लागत। खेती आज पहले से ज्यादा चुनौतियों का सामना कर रही है।

कृषि चुनौतियां में किसान के सामने सबसे बड़ा सवाल है—कम लागत में अच्छी कमाई कैसे हो?

इसी बीच इंदौर में BRICS देशों की कृषि बैठक शुरू हुई है। बैठक में खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल कृषि और किसानों की आय बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है।

हालांकि BRICS बैठक एक अंतरराष्ट्रीय मंच है, लेकिन यहां होने वाली चर्चा का असर गांवों और किसानों तक भी पहुंच सकता है।

खेती के सामने खड़ी हैं कई चुनौतियां

पिछले कुछ वर्षों में किसानों ने मौसम का बदला हुआ मिजाज करीब से देखा है।

राजस्थान समेत कई राज्यों में किसान इन समस्याओं से जूझ रहे हैं:

  • बेमौसम बारिश से फसलों का नुकसान
  • सूखे की बढ़ती घटनाएं
  • ओलावृष्टि से तैयार फसलें बर्बाद होना
  • खेती की बढ़ती लागत
  • उपज का उचित दाम न मिलना

ऐसे हालात में खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाना बड़ी जरूरत बन गया है।

खाद्य सुरक्षा की चर्चा, लेकिन किसान भी उतना ही जरूरी

बैठक में खाद्य सुरक्षा प्रमुख मुद्दों में शामिल है।

दुनिया की आबादी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सभी देशों के सामने पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराने की चुनौती है।

लेकिन सवाल यह भी है कि भोजन उगाने वाला किसान कितना सुरक्षित है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि मजबूत खाद्य व्यवस्था की शुरुआत मजबूत किसान से होती है।

यदि किसान आर्थिक रूप से सक्षम होगा, तभी वह बेहतर उत्पादन कर पाएगा।

बदलते मौसम से लड़ने की तैयारी

BRICS देशों की चर्चा का बड़ा हिस्सा Climate Smart Farming पर केंद्रित है।

इसका मतलब ऐसी खेती से है जो बदलते मौसम में भी बेहतर उत्पादन दे सके।

इस दिशा में कई उपायों पर जोर दिया जा रहा है:

  • कम पानी में खेती की तकनीक
  • मौसम के अनुकूल बीज
  • वैज्ञानिक खेती के तरीके
  • मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के उपाय

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रयास भविष्य में किसानों का जोखिम कम कर सकते हैं।

तकनीक खेती की तस्वीर बदल सकती है

आज तकनीक केवल शहरों तक सीमित नहीं है। कृषि क्षेत्र में भी इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।

बैठक में जिन तकनीकों पर चर्चा हो रही है, उनमें शामिल हैं:

  • ड्रोन से फसल निगरानी
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सलाह
  • डेटा आधारित खेती
  • स्मार्ट सिंचाई प्रणाली

इन तकनीकों से लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि असली चुनौती इन्हें छोटे किसानों तक पहुंचाने की होगी।

तकनीक और खेती का मेल किसानों के लिए नए अवसर खोल सकता है।

क्या किसानों को मिल सकते हैं नए बाजार

BRICS देशों के बीच कृषि सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

यदि सहयोग बढ़ता है तो भारतीय कृषि उत्पादों के लिए नए अवसर बन सकते हैं।

इससे किसानों को फायदा मिल सकता है:

  • बेहतर बाजार तक पहुंच
  • कृषि उत्पादों की बढ़ती मांग
  • मूल्य संवर्धित उत्पादों के अवसर
  • बेहतर कीमत मिलने की संभावना

बेहतर बाजार अक्सर बेहतर आय का रास्ता खोलते हैं।

भारत साझा करेगा अपने अनुभव

भारत इस मंच पर कृषि क्षेत्र के कई सफल मॉडल साझा कर रहा है।

इनमें शामिल हैं:

  • प्राकृतिक खेती
  • ई-नाम प्लेटफॉर्म
  • किसान उत्पादक संगठन (FPO)
  • डिजिटल कृषि पहल

इन प्रयासों ने कई किसानों को बाजार और तकनीक से जोड़ने में मदद की है।

सबकी नजर अब किसानों पर

इंदौर में चल रही BRICS बैठक का असर रातों-रात खेतों में दिखाई नहीं देगा।

फिर भी यहां होने वाली चर्चा आने वाले वर्षों की कृषि नीतियों को प्रभावित कर सकती है।

नई तकनीक, बेहतर बाजार और जलवायु-अनुकूल खेती की बातें उम्मीद जगाती हैं।

लेकिन असली सफलता तब होगी जब इनका लाभ छोटे और सीमांत किसानों तक पहुंचेगा।

दुनिया खेती को बचाने के उपाय खोज रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या इन प्रयासों से किसान का भविष्य भी अधिक सुरक्षित और मजबूत बन पाता है।

लेखिका: एंजल कटारिया

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