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गुजरात सरकार का बड़ा फैसला,11 जून से नर्मदा नहरों में छोड़ा जाएगा पानी,

खरीफ बुवाई के बीच गुजरात सरकार का बड़ा फैसला, किसानों को मिलेगा समय पर सिंचाई का पानी

गांव मंच डेस्क,गुजरात | किसानों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने 11 जून से नर्मदा नहर नेटवर्क में सिंचाई का पानी छोड़ने का फैसला किया है। यह निर्णय खरीफ सीजन की बुवाई को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि किसानों को फसल की शुरुआती अवस्था में पानी की कमी का सामना न करना पड़े।

मौसम विभाग के अनुसार गुजरात में मॉनसून के 15 जून के बाद पहुंचने की संभावना है। ऐसे में सरकार ने मॉनसून आने से पहले ही नहरों के जरिए सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। इससे किसानों को बुवाई और फसल स्थापना में काफी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने की जल भंडार की समीक्षा

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने नर्मदा परियोजना से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठक कर जल भंडार और किसानों की जरूरतों की समीक्षा की। इसके बाद नर्मदा नहर प्रणाली से पानी छोड़ने की मंजूरी दी गई। सरकार का मानना है कि इस कदम से किसानों को खरीफ फसलों की बेहतर शुरुआत करने में मदद मिलेगी।

1.73 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है बुवाई

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, गुजरात में अब तक करीब 1.73 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है। इनमें सबसे अधिक 93 हजार हेक्टेयर में कपास और लगभग 55 हजार हेक्टेयर में मूंगफली की बुवाई की गई है। राज्य में खरीफ सीजन की शुरुआत तेजी से हो रही है और किसान सिंचाई के लिए नहरों के पानी का इंतजार कर रहे हैं।

सौराष्ट्र में सबसे ज्यादा बुवाई

गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में खरीफ बुवाई सबसे अधिक दर्ज की गई है। यहां के 11 जिलों में लगभग 1.10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है। मॉनसून से पहले सिंचाई के लिए यह क्षेत्र काफी हद तक नर्मदा नहर के पानी पर निर्भर रहता है।

सरकार का कहना है कि समय पर पानी मिलने से किसानों को बुवाई जारी रखने में सुविधा होगी और नई फसलों को अंकुरण तथा शुरुआती विकास के लिए आवश्यक नमी भी मिल सकेगी।

किसानों के लिए जीवनरेखा है नर्मदा नहर नेटवर्क

नर्मदा नहर नेटवर्क गुजरात के किसानों के लिए सिंचाई का सबसे बड़ा और भरोसेमंद जल स्रोत माना जाता है। इसके माध्यम से सौराष्ट्र, कच्छ और उत्तर गुजरात सहित कई कृषि क्षेत्रों तक पानी पहुंचाया जाता है। खासकर खरीफ सीजन की शुरुआत में यह नहर प्रणाली खेती को महत्वपूर्ण सहारा देती है।

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लेखिका: हीना शर्मा

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