आधी रात की परेशानी का समाधान
- ग्रामीण राजस्थान में पशुपालन किसानों की आय का बड़ा आधार है।
- लेकिन जब कोई गाय या भैंस अचानक बीमार हो जाए, तो सबसे बड़ी चुनौती डॉक्टर और अस्पताल तक पहुंचने की होती है।
- इसी समस्या को कम करने के लिए राजस्थान सरकार और केंद्र सरकार ने मोबाइल वेटरनरी यूनिट (MVU) शुरू की है।
कैसे काम करती है यह सेवा?
- प्रदेश में 536 मोबाइल वेटरनरी यूनिट गाड़ियां संचालित की जा रही हैं।
- हर यूनिट में एक पशु चिकित्सक, एक पशुधन सहायक और एक चालक मौजूद रहता है।
- इन गाड़ियों में दवाइयां, टीकाकरण, गर्भ जांच और छोटी सर्जरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
एक कॉल पर पहुंचेगी टीम
- पशुपालकों को सेवा लेने के लिए केवल 1962 टोल फ्री नंबर पर कॉल करना होता है।
- इसके अलावा 9063475027 व्हाट्सएप चैटबॉट के जरिए ऑनलाइन परामर्श और प्रिस्क्रिप्शन भी प्राप्त किया जा सकता है।
लाखों पशुपालकों को मिला लाभ
- सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 62 लाख से अधिक पशुओं का उपचार किया जा चुका है
- और 16 लाख से ज्यादा पशुपालक इस सेवा का लाभ ले चुके हैं।
- इससे दूरदराज के गांवों में पशु चिकित्सा सेवाओं की पहुंच बढ़ी है।
अब असली परीक्षा मैदान में
- योजना का उद्देश्य सराहनीय है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि गाड़ियां समय पर पहुंचें, डॉक्टर उपलब्ध रहें और सेवाएं लगातार जारी रहें।
- मजबूत निगरानी और जवाबदेही ही इस पहल को वास्तव में ग्रामीण पशुपालकों के लिए उपयोगी बना सकती है।
लेखिका- तनु रूंगटा


